उत्तर प्रदेश में एसआईआर के नाम पर लोकतंत्र पर हमला, 2.90 करोड़ वोट कटने का आरोप: संजय सिंह

एसआईआर गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों को वोट से बाहर करने की साजिश: संजय सिंह

लखनऊ, 7 जनवरी 2026। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 2 करोड़ 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, जो देश के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा “वोट घोटाला” है।

मंगलवार को जारी अपने बयान में संजय सिंह ने कहा कि यह प्रक्रिया किसी भी तरह का चुनाव सुधार नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से गरीब, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और मजदूर वर्ग को मताधिकार से वंचित करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए वोटरों को जानबूझकर सूची से बाहर किया गया।

संजय सिंह ने मतदाता आंकड़ों में भारी अंतर पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिसंबर में जारी ग्रामीण मतदाता सूची में उत्तर प्रदेश में 12 करोड़ 70 लाख ग्रामीण मतदाता दर्ज थे, जबकि 6 जनवरी को एसआईआर के बाद जारी नई सूची में पूरे प्रदेश के शहरी और ग्रामीण मिलाकर केवल 12 करोड़ 55 लाख मतदाता दिखाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब दिसंबर में सिर्फ ग्रामीण मतदाताओं की संख्या इससे अधिक थी, तो अब शहरी मतदाता जोड़ने के बाद कुल संख्या कैसे घट गई, यह अपने आप में लोकतंत्र का मजाक है।

आप सांसद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने अलग-अलग श्रेणियां बनाकर बड़े पैमाने पर नाम काटे। करीब 25 लाख मतदाताओं को दो जगह नाम होने का हवाला देकर हटाया गया, 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं को “शिफ्टेड” या “अनट्रेसेबल” घोषित किया गया और 45–46 लाख लोगों को मृत दिखा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 84 लाख मतदाताओं के नाम यह कहकर काटे गए कि वे घर पर नहीं मिले, जबकि बीएलओ पर ऊपर से दबाव बनाकर यह कार्रवाई कराई गई।

संजय सिंह ने कहा कि “शिफ्टेड” बताए गए लाखों लोग रोजगार के लिए दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में काम करने गए हैं। यदि वहां भी उनका नाम नहीं है और उत्तर प्रदेश में भी काट दिया गया, तो उनका मताधिकार कहां गया? उन्होंने इसे संविधान द्वारा प्रदत्त वोट के अधिकार पर सीधा हमला बताया।

उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा एक महीने के भीतर नाम जुड़वाने के लिए 13 प्रकार के दस्तावेज मांगे जाने को भी गरीबों को वोट से वंचित करने का हथकंडा बताया। संजय सिंह ने कहा कि एक गरीब मजदूर हाईस्कूल प्रमाणपत्र, जमीन के कागज या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज कहां से लाएगा। उनका आरोप था कि यह शर्तें जानबूझकर इसलिए रखी गई हैं ताकि कमजोर वर्ग अपने नाम दोबारा न जुड़वा सके।

आप सांसद ने एसआईआर को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस तरह का व्यापक पुनरीक्षण कराने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही प्रदेश में एक ही सरकारी कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई दो मतदाता सूचियों में इतना बड़ा अंतर कैसे हो सकता है।

संजय सिंह ने बताया कि आम आदमी पार्टी ने अब तक लगभग 6,000 बीएलओ तैयार कर लिए हैं और आगे यह संख्या और बढ़ाई जाएगी। उन्होंने जनता से अपील की कि जिन लोगों के नाम जबरन काटे गए हैं, उन्हें सामने लाया जाए और इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए।

अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए वोट के अधिकार की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपना नाम मतदाता सूची में जरूर जांचें और जरूरत पड़ने पर तुरंत जुड़वाएं, ताकि लोकतंत्र के इस मूल अधिकार से वंचित न होना पड़े।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *