लेह/जम्मू, 2 जनवरी । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वित्तीय शक्तियों के प्रत्यायोजन नियम (डीएफपीआरएस), 2024 के तहत लद्दाख के उपराज्यपाल को 100 करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं के मूल्यांकन और स्वीकृति से संबंधित प्रत्यायोजित शक्तियां पुनः बहाल कर दी हैं। इस संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।
आदेश के अनुसार, बिना विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों और उपराज्यपालों को 100 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी देने की शक्तियां दी गई हैं। इन केंद्र शासित प्रदेशों में लद्दाख के अलावा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव और लक्षद्वीप शामिल हैं।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय में उप सचिव लेंदुप शेरपा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी ने डीएफपीआरएस, 2024 के तहत इन केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों और उपराज्यपालों को 100 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के मूल्यांकन और स्वीकृति के लिए शक्तियों के प्रत्यायोजन को कुछ शर्तों के अधीन मंजूरी प्रदान की है।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब लगभग एक माह पूर्व गृह मंत्रालय ने लद्दाख के उपराज्यपाल की 100 करोड़ रुपये तक की योजनाओं और परियोजनाओं को स्वीकृति देने की शक्तियों को वापस ले लिया था। इसके साथ ही प्रशासनिक सचिवों की 20 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी देने की शक्तियां भी उस समय समाप्त कर दी गई थीं। उस फैसले के बाद लद्दाख में विकास परियोजनाओं की रफ्तार को लेकर सवाल उठने लगे थे।
नए आदेश के अनुसार, उपराज्यपाल इन शक्तियों का प्रयोग संबंधित केंद्र शासित प्रदेश के वित्त सचिव या समकक्ष वित्तीय सलाहकार से परामर्श करके करेंगे। इसके अलावा यह भी अनिवार्य होगा कि संबंधित परियोजनाओं के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान उपलब्ध हों।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शक्तियों की बहाली से लद्दाख में बुनियादी ढांचे, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य विकास परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिलने में तेजी आएगी। यह कदम क्षेत्र में प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करने और विकास कार्यों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
