नई दिल्ली, एक जनवरी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) की 68वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि संगठन ने आॅपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका निभाई और यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा में इसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सिंह ने बताया कि डीआरडीओ ‘सुदर्शन चक्र’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा और उन्होंने भरोसा जताया कि यह लक्ष्य जल्द से जल्द हासिल किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में लाल किले की प्राचीर से ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा की थी। रक्षामंत्री ने कहा कि इस पहल के तहत अगले दशक में डीआरडीओ को महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों को वायु रक्षा प्रणाली से लैस करने का दायित्व सौंपा गया है। सिंह ने आॅपरेशन सिंदूर के दौरान आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डीआरडीओ की स्थापना 1958 में तकनीकी विकास प्रतिष्ठानों और रक्षा विज्ञान संगठन के विलय से हुई थी। तब संगठन में केवल 10 प्रयोगशालाएं थीं, लेकिन आज यह बहुआयामी विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी संगठन बन गया है। सिंह ने डीआरडीओ से कहा कि तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ तालमेल बनाए रखते हुए नवाचार पर ध्यान देना जारी रखें और ऐसे क्षेत्र खोजें जहां निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सके।
उन्होंने बताया कि आॅपरेशन सिंदूर के दौरान डीआरडीओ के उपकरणों ने बिना किसी रुकावट के काम किया, जिससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा। भारत ने 6 मई को कश्मीर में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर के तहत कार्रवाई की थी, जिसमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए।
सिंह ने डीआरडीओ की निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और शिक्षा जगत के साथ सहयोग की सराहना की और कहा कि यह एक मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है। उन्होंने वैज्ञानिकों और कर्मियों की प्रतिबद्धता, नवाचार और राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना की भी प्रशंसा की।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे। सिंह ने सोशल मीडिया पर डीआरडीओ परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संगठन की स्वदेशी तकनीकें भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और सशस्त्र बलों के विश्वास को मजबूत कर रही हैं।
