अब चुनाव नहीं लड़ूंगा, चुनाव जिताने पर रहेगा फोकस: 2027 को ‘करो या मरो’ बताते हुए हरीश रावत का बड़ा बयान

नयी दिल्ली, एक जनवरी। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने साफ कर दिया है कि वह अब स्वयं चुनाव मैदान में उतरने के बजाय पार्टी के लिए चुनाव जिताने की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए “करो या मरो” जैसा होगा और उनका पूरा ध्यान पार्टी को सत्ता में वापस लाने पर केंद्रित रहेगा।

बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बातचीत में रावत ने कहा कि वह अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और इस फैसले पर पूरी तरह दृढ़ हैं। उन्होंने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वह उम्मीदवार नहीं बनना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के चलते चुनाव लड़ना पड़ा। इस बार उन्होंने स्पष्ट रूप से तय कर लिया है कि वह संगठन, रणनीति और प्रचार के जरिए पार्टी को जीत दिलाने के लिए काम करेंगे।

उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में संभावित है। इस चुनाव को निर्णायक बताते हुए रावत ने कहा कि कांग्रेस लगातार तीसरी बार हार का जोखिम नहीं उठा सकती। उन्होंने कहा कि 70 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी का लक्ष्य कम से कम 40 सीटें हासिल कर सरकार बनाना होना चाहिए। रावत के अनुसार, अब समय व्यक्तिगत चुनाव लड़ने से अधिक सामूहिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान देने का है।

इस सवाल पर कि उनके चुनाव नहीं लड़ने से जनता के बीच कांग्रेस के खिलाफ कोई नकारात्मक संदेश तो नहीं जाएगा, रावत ने अपने राजनीतिक अनुभव का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन पार्टी के प्रचार और समन्वय की जिम्मेदारी संभाली थी। इन चुनावों में कांग्रेस ने या तो जीत दर्ज की या मजबूत मुकाबला किया, जिससे यह साबित होता है कि चुनावी सफलता केवल उम्मीदवार बनने पर निर्भर नहीं करती।

मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से जुड़े सवाल पर रावत ने कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व चयन की एक लोकतांत्रिक और तय प्रक्रिया है, जिसके तहत ही मुख्यमंत्री का फैसला होता है। उन्होंने इस मुद्दे पर किसी तरह की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से इनकार किया।

रावत ने राज्य के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हाल में सामने आए नए तथ्यों को देखते हुए इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई से कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की गई ताकि सत्तारूढ़ भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी न उठानी पड़े।

इसके अलावा, उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह जरूरी है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी राजनीतिक दबाव के संपन्न हो।

कुल मिलाकर, हरीश रावत का यह बयान उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस की 2027 की रणनीति का स्पष्ट संकेत देता है, जिसमें नेतृत्व से ज्यादा संगठन और चुनावी प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाएगी।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *