2027 के बाद वनडे क्रिकेट पर संकट के बादल: टी20 लीग, अत्यधिक टूर्नामेंट और दर्शकों की घटती रुचि पर अश्विन की खुली चिंता

विश्व कप 2027 के बाद वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंतित हूं: अश्विन

चेन्नई, एक जनवरी । भारत के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने 2027 के वनडे विश्व कप के बाद 50 ओवरों के क्रिकेट के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका मानना है कि तेजी से फैलती टी20 लीग, अत्यधिक अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर और आईसीसी द्वारा लगभग हर साल किसी न किसी बड़े टूर्नामेंट के आयोजन ने वनडे प्रारूप की प्रासंगिकता को कमजोर कर दिया है। अश्विन के अनुसार, जहां टेस्ट क्रिकेट अपनी पारंपरिक प्रतिष्ठा के कारण अब भी दर्शकों के बीच सम्मान बनाए हुए है, वहीं टी20 क्रिकेट की लोकप्रियता और व्यावसायिक सफलता के बीच वनडे क्रिकेट लगभग गैर-जरूरी सा होता जा रहा है।

अपने हिंदी यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ पर बातचीत के दौरान अश्विन ने कहा कि वह विजय हजारे ट्रॉफी जैसे घरेलू वनडे टूर्नामेंट देख रहे हैं, लेकिन दर्शकों की रुचि और माहौल वैसा नहीं दिखता जैसा सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान देखने को मिलता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2027 विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट किस दिशा में जाएगा, इसे लेकर वह स्वयं आश्वस्त नहीं हैं। उनके अनुसार, किसी भी खेल की निरंतरता दर्शकों की पसंद से जुड़ी होती है और आज के समय में दर्शक तेजी, रोमांच और कम समय में नतीजे चाह रहे हैं, जो टी20 प्रारूप उन्हें देता है।

अश्विन ने यह भी रेखांकित किया कि क्रिकेट को दर्शकों से जोड़ने में स्टार खिलाड़ियों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने हाल ही में विजय हजारे ट्रॉफी में रोहित शर्मा और विराट कोहली के खेलने से उमड़ी भीड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही खेल खिलाड़ियों से बड़ा होता है, लेकिन कई बार खेल को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए ऐसे सितारों की मौजूदगी जरूरी हो जाती है। उनका सवाल था कि जब रोहित और विराट जैसे खिलाड़ी वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे, तब इस प्रारूप को देखने कौन आएगा।

पूर्व भारतीय स्पिनर ने वनडे क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर भी बात की और कहा कि एक समय यह प्रारूप महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ियों को सामने लाया, जो पारी को संभालने और अंत में आक्रामक खेलने की कला में माहिर थे। लेकिन दो नई गेंदों और फील्डिंग प्रतिबंधों के कारण अब वैसी बल्लेबाजी की आवश्यकता भी नहीं रह गई है। अश्विन ने आईसीसी से अपील की कि वह केवल राजस्व के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि खेल के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपने कैलेंडर पर पुनर्विचार करे। उन्होंने कहा कि बहुत ज्यादा द्विपक्षीय सीरीज, कई प्रारूप और बार-बार होने वाले विश्व कप क्रिकेट को अत्यधिक बोझिल बना रहे हैं। अश्विन के अनुसार, यदि वनडे क्रिकेट को बचाना है तो चार साल में केवल एक विश्व कप आयोजित करना ही इसका सबसे व्यावहारिक समाधान हो सकता है।

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