स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन के नोटिस का भेजा जवाब, आरोपों को बताया निराधार

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज (उप्र), 22 जनवरी । माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को कथित रूप से रोके जाने से जुड़े विवाद के बीच स्वामी की ओर से मेला प्रशासन द्वारा जारी दूसरे नोटिस का औपचारिक जवाब भेज दिया गया है। जवाब में मेला प्रशासन के आरोपों को निराधार, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यहीन बताया गया है।

मेला प्रशासन ने दूसरे नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा था कि क्यों न उनकी संस्था को दी जा रही भूमि और सुविधाएं निरस्त कर दी जाएं और उन्हें सदैव के लिए माघ मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए। प्रशासन का आरोप था कि मौनी अमावस्या के दिन स्वामी जी ने अत्यधिक भीड़ के दौरान आरक्षित पुल संख्या दो पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए बग्घी पर सवार होकर प्रवेश किया, जबकि उस समय केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया है कि यह आरोप पूरी तरह झूठा और दुर्भावनापूर्ण है। नोटिस के जवाब में स्पष्ट किया गया है कि न तो वर्तमान में स्वामी के शिविर में और न ही उनके किसी आश्रम में कोई बग्घी उपलब्ध है।

जवाब में यह भी कहा गया है कि स्वामी जी मौनी अमावस्या पर परंपरागत पालकी से संगम स्नान के लिए जा रहे थे, जिसमें लगभग छह इंच व्यास के स्टील के पहिये लगे होते हैं। इन पहियों की सहायता से कभी-कभी भक्त पालकी को आगे बढ़ाते हैं।
स्वामी की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि पालकी में घोड़े या मोटर का कोई प्रावधान नहीं है।

मेला प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरियर तोड़ने के आरोप पर जवाब में कहा गया है कि स्वामी जी ने पुलिसकर्मियों से बातचीत कर बैरियर खुलवाया था, न कि किसी प्रकार से उसे तोड़ा गया।

नोटिस के जवाब में मेला प्रशासन को चेतावनी भी दी गई है कि यदि कोई अधिकारी गैरकानूनी, असंवैधानिक, दुर्भावनापूर्ण या अनुचित कदम उठाता है, तो स्वामी पक्ष को सक्षम न्यायालय में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

प्रशासन का पक्ष

मेला प्रशासन ने अपने नोटिस में कहा था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इस कथित कृत्य के कारण भीड़ प्रबंधन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और इससे भगदड़ तथा जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। इसी आधार पर संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाएं निरस्त करने और स्थायी प्रतिबंध लगाने पर विचार किए जाने की बात कही गई थी।

नोटिस को लेकर आरोप

इस मामले पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने आरोप लगाया कि प्रशासन बदले की भावना से कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि नोटिस शंकराचार्य शिविर के पंडाल के पीछे पिछली तिथि (18 जनवरी) से चस्पा किया गया था, जिसकी जानकारी प्रशासनिक कर्मचारी द्वारा बताए जाने के बाद ही मिली।

पहले नोटिस का भी विवाद

गौरतलब है कि इससे पहले मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक अन्य नोटिस जारी कर कहा था कि दिवानी अपील पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार, अपील निस्तारित होने तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।
नोटिस में यह भी कहा गया था कि इसके बावजूद माघ मेला 2025-26 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित किया गया है।

मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह विवाद फिलहाल जारी है और आने वाले दिनों में इस पर प्रशासनिक या कानूनी स्तर पर आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।

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