स्थानीय निकाय चुनावों में 50% आरक्षण सीमा पार न करने का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को दी चेतावनी

नयी दिल्ली, 17 नवंबर—उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि दिसंबर में प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सीमा का उल्लंघन हुआ तो चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने में उसे कोई हिचक नहीं होगी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव उन्हीं शर्तों के तहत कराए जा सकते हैं जो 2022 में जे. के. बांठिया आयोग की रिपोर्ट से पहले लागू थीं। बांठिया आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी, परंतु यह रिपोर्ट अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और उस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर अगली सुनवाई 19 नवंबर के लिए सूचीबद्ध की। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि जब तक मामला लंबित है, राज्य को किसी भी परिस्थिति में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं ले जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “यदि दलील यह है कि नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस कारण अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, तो हम चुनाव पर रोक लगा देंगे। अदालत की शक्तियों को परखने की कोशिश न की जाए।” पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान पीठ द्वारा तय 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को पार करना किसी भी अदालत का उद्देश्य नहीं रहा है और दो-न्यायाधीशों की पीठ इस सीमा को बदलने का अधिकार नहीं रखती।

कोर्ट ने उन याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है जिनमें दावा किया गया है कि कुछ स्थानीय निकायों में कुल आरक्षण 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो संविधाननिष्ठ सीमा का उल्लंघन है। तुषार मेहता ने बताया कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख सोमवार है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 6 मई के उस आदेश का हवाला दिया जिसने चुनाव कराने की अनुमति प्रदान की थी।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा, “हमने पहले ही संकेत दिया था कि बांठिया रिपोर्ट से पूर्व की स्थिति को कायम रखा जा सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी वर्गों के लिए 27 प्रतिशत तक आरक्षण देना वैध माना जाएगा। ऐसा करना अदालत के पूर्व आदेशों के विपरीत होगा।”

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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