नयी दिल्ली, आठ जनवरी । जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे आंगमो ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि उसे रोकने के उद्देश्य से था। उन्होंने कहा कि प्रशासन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर वांगचुक को अपराधी के रूप में दिखा रहा है।
गीतांजलि ने अदालत को बताया कि वांगचुक को हिरासत के पूरे आधार नहीं बताए गए और उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का उचित अवसर भी नहीं मिला। इस मामले की सुनवाई अधूरी रही और यह 12 जनवरी को जारी रहेगी।
वांगचुक को लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था। इन विरोध प्रदर्शनों में चार लोग मारे गए और 90 अन्य घायल हुए थे। सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।
वकील कपिल सिब्बल ने न्यायाधीशों को बताया कि वांगचुक का भाषण भूख हड़ताल समाप्त करते समय दिया गया था और इसका उद्देश्य हिंसा को रोकना था। उन्होंने कहा, ”भाषण का लहजा किसी भी तरह से राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं था और न ही यह हिंसा फैलाने का इरादा दर्शाता है।”
सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत के आदेश में चार वीडियो को आधार बनाकर वांगचुक को हिरासत में लिया गया, लेकिन उन्हें ये वीडियो और अन्य दस्तावेज 28 दिनों तक नहीं दिखाए गए, जो संविधान के अनुच्छेद 22 का उल्लंघन है। उन्होंने अदालत से कहा कि हिरासत के आधार और उससे संबंधित दस्तावेजों की देरी या असमयता बंदी के प्रभावी प्रतिनिधित्व के अधिकार का उल्लंघन मानी जाएगी।
सुनवाई अब 12 जनवरी को आगे जारी रहेगी।
