नयी दिल्ली, 13 जनवरी। कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ में शामिल होने की अपील की। पार्टी ने इस अभियान को काम, मजदूरी और जवाबदेही से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए जारी एक व्यापक जनसंघर्ष बताया है।
कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ देश की करीब 25 लाख ग्राम पंचायतों और करोड़ों लोगों तक पहुंचेगा। उन्होंने हिंदी में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “सरकार ने मनरेगा योजना को कुचल दिया है, जो करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा रही है। यह राष्ट्रव्यापी संघर्ष काम, मजदूरी और जवाबदेही के संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए है।” उन्होंने लोगों से इस अभियान से जुड़ने का आग्रह किया।
रमेश ने पोस्ट में एक लिंक भी साझा किया, जिसके माध्यम से लोग ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ में भाग ले सकते हैं। अभियान से जुड़ने वाले लोग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी जाने वाली एक याचिका पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं। याचिका में मनरेगा में हाल के बदलावों पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा गया है कि इनसे गारंटीशुदा रोजगार और ग्रामीण सशक्तिकरण के मूल उद्देश्य कमजोर हो रहे हैं। इसमें काम की गारंटी बहाल करने, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय करने और पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने की मांग की गई है।
कांग्रेस महासचिव एवं संगठन प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल ने एआईसीसी के महासचिवों, राज्य प्रभारियों, सचिवों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों को पत्र जारी कर ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत आयोजित गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने वाले नारों की सूची साझा की है। इसके साथ ही उन्होंने ‘काम मांगो अभियान’ से जुड़े निर्देश और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी का एक वीडियो संदेश भी साझा किया।
वेणुगोपाल ने अपने पत्र में कहा कि यह वीडियो ग्राम स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के दौरान सभी मनरेगा श्रमिकों को दिखाया जाना है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र शीघ्र ही साझा किया जाएगा, जिसका स्थानीय भाषाओं में अनुवाद कर व्यापक वितरण किया जाएगा।
‘काम मांगो अभियान’ के तहत कांग्रेस ने अपने पदाधिकारियों से आग्रह किया है कि वे कम से कम 10 ऐसे श्रमिकों को एकत्र करें, जिनके पास रोजगार कार्ड हैं और जिन्हें काम की आवश्यकता है, ताकि वे अपने कार्ड के साथ ग्राम पंचायत कार्यालयों में आवेदन कर सकें। पार्टी ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो श्रमिक ब्लॉक या प्रखंड स्तर पर बेरोजगारी भत्ते के लिए सामूहिक आवेदन दें।
कांग्रेस ने 10 जनवरी से 25 फरवरी तक ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाने की घोषणा की है। पार्टी की मांग है कि ‘विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन–ग्रामीण’ (वीबी-जी रामजी) अधिनियम को वापस लिया जाए और मनरेगा को एक अधिकार-आधारित कानून के रूप में पूरी तरह बहाल किया जाए। यह विधेयक संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन चुका है।
अभियान की निगरानी और समन्वय के लिए कांग्रेस ने एक समिति का गठन किया है, जिसके संयोजक अजय माकन हैं। वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, संदीप दीक्षित और प्रियांक खरगे इसके सदस्य हैं।
