सपा विधायक सुधाकर सिंह का निधन, घोसी में छाई शोक की लहर; लखनऊ में मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस

मऊ जिले की चर्चित घोसी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक सुधाकर सिंह का गुरुवार सुबह लखनऊ के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। 67 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बेटे डॉ. सुजीत सिंह ने पिता के निधन की पुष्टि की। निधन की खबर फैलते ही मऊ से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई और समर्थक गहरे सदमे में हैं।

परिवार के अनुसार, सुधाकर सिंह की तबीयत पिछले कुछ दिनों से लगातार खराब चल रही थी। 17 नवंबर को दिल्ली में मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी के रिसेप्शन में शामिल होने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। तबीयत में तेजी से गिरावट के बाद उन्हें मंगलवार को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनका इलाज कर रही थी। लेकिन सभी प्रयासों के बावजूद गुरुवार सुबह उनका निधन हो गया।

सुधाकर सिंह हाल ही में हुए घोसी उपचुनाव में अपनी शानदार जीत के कारण सुर्खियों में आए थे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान को बड़े अंतर से हराकर न केवल अपनी लोकप्रियता साबित की, बल्कि घोसी में सपा का किला भी मजबूत किया। उनकी जीत ने सपा का मनोबल बढ़ाया था और उन्हें एक बार फिर क्षेत्र का मजबूत नेता स्थापित किया था।

राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले सुधाकर सिंह मूल रूप से घोसी के ही रहने वाले थे और लंबे समय से इस इलाके की राजनीति में सक्रिय थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वे समाजवादी पार्टी के मजबूत दावेदार थे और पार्टी ने उन्हें टिकट भी दिया था, लेकिन अंतिम समय में टिकट काटकर भाजपा से आए दारा सिंह चौहान को उम्मीदवार बना दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी के फैसले का सम्मान किया और संगठन के साथ बने रहे।

बाद में जब दारा सिंह चौहान ने फिर से पाला बदलते हुए भाजपा में वापसी की, तो घोसी सीट पर 2023 में उपचुनाव कराना पड़ा। इस चुनाव में सपा ने सुधाकर सिंह पर भरोसा जताया और उन्होंने जोरदार मुकाबले में दारा सिंह चौहान को हराकर अपनी योग्यता साबित कर दी। उनकी यह जीत उनके राजनीतिक करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जाती है।

सुधाकर सिंह को घोसी क्षेत्र में एक जमीनी नेता के रूप में जाना जाता था। वे आम लोगों से सीधे संवाद रखने और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहने के लिए लोकप्रिय थे। उनके निधन से न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि पूरे घोसी क्षेत्र में भारी शोक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने एक सरल, मिलनसार और संघर्षशील नेता को खो दिया है।

सपा नेताओं ने उनके निधन को पार्टी की बड़ी क्षति बताया है। आने वाले समय में घोसी की राजनीति पर इस घटना का गहरा प्रभाव पड़ सकता है। सुधाकर सिंह की राजनीतिक विरासत अब उनके परिवार और समर्थकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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