नई दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा)। प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू ने बुधवार को कहा कि आज सनातन धर्म के सामने सबसे बड़ा खतरा किसी बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि आंतरिक विभाजन से है। उन्होंने उन संप्रदायों पर गहरी चिंता व्यक्त की जो मनगढ़ंत देवताओं को स्थापित करने, उन्हें बढ़ावा देने और पवित्र ग्रंथों में अनधिकृत बदलाव (क्षेपक) कर झूठी कथाओं का प्रचार कर रहे हैं।
यहां ‘भारत मंडपम’ में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के समापन अवसर पर मोरारी बापू ने कहा, “भले ही ऐसे संप्रदायों को अन्य शक्तिशाली ‘गादियों’ का समर्थन मिल जाए, लेकिन ‘व्यास पीठ’ उन्हें कभी मान्यता नहीं देगी। व्यास पीठ अनादि काल से सनातन धर्म के वास्तविक मूल्यों, शास्त्रों और भगवान राम, कृष्ण, शिव तथा मां दुर्गा जैसे आराध्य देवों के प्रति अडिग रही है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म को किसी ऐतिहासिक तिथि या सीमित कालखंड में नहीं बांधा जा सकता। उनके अनुसार, सनातन धर्म सभी आध्यात्मिक परंपराओं का सार है और इसके मूल में सत्य, प्रेम, करुणा और अहिंसा जैसे सार्वकालिक मूल्य निहित हैं।
‘मानस सनातन धर्म’ शीर्षक से आयोजित यह रामकथा 17 जनवरी से 25 जनवरी तक चली। समापन अवसर पर मोरारी बापू ने वेदों सहित विभिन्न शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन धर्म ही एकमात्र शाश्वत धर्म है, जिसकी परंपरा वेदों से प्रारंभ होकर उपनिषदों, पुराणों और भगवद्गीता तक प्रवाहित होती है।
उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ इस शास्त्रीय परंपरा की अंतिम प्रामाणिक कड़ी है और इसके बाद लिखे गए किसी भी ग्रंथ को सनातन धर्म के मूल ग्रंथों में शामिल नहीं किया जा सकता।
सनातन धर्म के प्रतीकों को परिभाषित करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि इसका प्रवाह गंगा है, पर्वत कैलाश है, अक्षय वृक्ष वटवृक्ष है, ग्रंथ वेद हैं, चक्र सुदर्शन है, शीतलता चंद्रमा है और प्रकाश स्वयं भगवान सूर्य हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया था, जबकि समापन सत्र को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संबोधित किया। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी उपस्थित रहीं और उन्होंने यमुना को स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के पहले दिन मोरारी बापू ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
