लखनऊ, 21 जनवरी । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का मूल स्तंभ है और यह समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को सरकार तक पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ यह विचार 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन और विधायी निकायों के सचिवों के 62वें सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत का विधानमंडल केवल कानून बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि समावेशी और व्यापक विकास की नीतियों को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आदित्यनाथ ने कहा, “विधानमंडल संविधान का संरक्षक है। यह न्याय, समानता और भाईचारे के संवैधानिक मूल्यों को साकार करने का मंच है। यह वह जगह है जहां समान समाज के निर्माण के लिए नीतियां बनाई जाती हैं और जहां आम सहमति, संवाद और स्वस्थ बहस के माध्यम से लोकतंत्र का सार व्यक्त होता है।”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारे लोकतंत्र में समाज के सबसे निचले स्तर पर खड़ा व्यक्ति भी अपने चुने हुए प्रतिनिधि के माध्यम से अपनी बात संसद और विधानमंडल में रख सकता है, और उसे पूरी गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने चुने हुए प्रतिनिधियों को लोकतंत्र का मुख्य स्तंभ बताया।
गोरखपुर से पांच बार लोकसभा सदस्य के अनुभव को याद करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि संसद ने उन्हें शासन, आचरण, प्रक्रियाओं और आम सहमति बनाने के मूल्यों की शिक्षा दी। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य विधानमंडल संसदीय प्रथाओं और प्रक्रियाओं से सीख लेकर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रश्नकाल के नियमों में बदलाव करके विधायकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे मुद्दों को उठाने और कार्यवाही की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
आदित्यनाथ ने तीन दिवसीय सम्मेलन में सार्थक योगदान देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना और विधायी संस्थाओं के अधिकारियों का धन्यवाद भी किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करते हैं और उनके कामकाज को जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप बनाने में मदद करते हैं।
