विदेशियों की पहचान के नाम पर देश को गुमराह किया गया: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और निर्वाचन आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

पटना, 1 अक्टूबर :बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और निर्वाचन आयोग पर बड़ा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया को “घुसपैठियों की पहचान” के रूप में प्रचारित कर जनता को गुमराह किया गया, जबकि हाल ही में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में एक भी विदेशी नागरिक नहीं पाया गया।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने पटना में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री और निर्वाचन आयोग दोनों ने बार-बार एसआईआर को अवैध विदेशियों की पहचान से जोड़कर प्रस्तुत किया था। लेकिन 30 सितंबर को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची ने इन दावों की सच्चाई उजागर कर दी – सूची में एक भी विदेशी नहीं मिला।

कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया – मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट

दुबे ने बताया कि इस वर्ष 24 जून को राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.89 करोड़ थी, जबकि नई अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 7.42 करोड़ रह गई है – यानी लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट।

उन्होंने कहा कि कुल 68.6 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिनमें:

  • 22 लाख मृत घोषित किए गए,

  • 36 लाख को स्थायी पलायन या अनुपस्थिति के आधार पर हटाया गया,

  • 7 लाख अन्यत्र पंजीकृत पाए गए।

इनमें से प्रारूप सूची के दौरान 65 लाख और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में 3.66 लाख नाम हटाए गए। इसके साथ ही केवल 21.53 लाख नए मतदाता जोड़े गए।

“घुसपैठियों” का क्या हुआ?

कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब एक भी विदेशी नहीं पाया गया, तो यह प्रक्रिया नागरिकता सत्यापन अभियान की तरह क्यों चलाई गई?

दुबे ने कहा, “आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क दिया था कि उसे मतदाता से नागरिकता का प्रमाण मांगने का अधिकार है और इसके तहत सख्त दस्तावेजी प्रावधान भी लागू किए गए। लेकिन नतीजा क्या निकला? विदेशियों की संख्या शून्य रही।

महिलाओं को लेकर चिंता

दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग ने मतदाता सूची का लिंगवार विवरण सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रतीत होता है कि सूची से हटाई गई महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक है, जो एक चिंताजनक संकेत है।

कांग्रेस के पांच सवाल निर्वाचन आयोग से

अभय दुबे ने निर्वाचन आयोग से पांच सवाल पूछे:

  1. क्या प्रधानमंत्री और आयोग ने जानबूझकर झूठ फैलाया कि एसआईआर घुसपैठियों की पहचान के लिए है?

  2. जिन लोगों को मृत बताया गया, क्या उनके मृत्यु प्रमाणपत्र की वैधता की जांच की गई?

  3. फॉर्म 6ई से जो नए मतदाता जोड़े गए, क्या वे पहले हटाए गए लोगों में से हैं या नए मतदाता हैं?

  4. मृत, पलायन, दोहराव आदि के लिए अलग-अलग श्रेणियों की सूची क्यों सार्वजनिक नहीं की गई?

  5. क्या यह सच है कि सूची से हटाई गई महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है?

भविष्य में सीबीआई जांच की मांग

दुबे ने एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को “संदिग्ध और पूर्वनियोजित” करार दिया और कहा कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र है। उन्होंने दावा किया, “जब भी सरकार बदलेगी, इस प्रक्रिया की सीबीआई जांच करवाई जाएगी और तब यह ‘वोट चोरी’ का खेल पूरी तरह बेनकाब होगा।”

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