पटना, 16 नवंबर – राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने रविवार को आरोप लगाया कि उनके भाई तेजस्वी यादव के कुछ सहयोगी उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप फैला रहे हैं। रोहिणी के अनुसार उनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने पिता को “गंदी किडनी” दी और इसके बदले करोड़ों रुपये और पार्टी का टिकट लिया।
भावुक होते हुए रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “किसी घर रोहिणी जैसी बेटी न हो।” यह पोस्ट उन्होंने राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से नाता तोड़ने की घोषणा के अगले दिन साझा की। उन्होंने हाल में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए अपने भाई तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगियों, हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले सांसद संजय यादव और उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले रमीज को जिम्मेदार ठहराया।
सारण लोकसभा सीट से पिछले साल चुनाव लड़ने वाली एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुकीं रोहिणी ने कहा कि उन्हें गालियों के साथ अपमानित किया गया। उन्होंने कहा, “मुझसे तो यह बड़ा गुनाह हो गया कि मैंने अपना परिवार और अपने तीनों बच्चों को नहीं देखा। किडनी देते वक्त न अपने पति, न अपने ससुराल से अनुमति ली। अपने पिता को बचाने के लिए जो किया, उसे आज गंदा बताया जा रहा है।”
रोहिणी ने संजय यादव और रमीज पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दोनों खुद को “चाणक्य” समझते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की बातों को कोई महत्व नहीं देते। उन्होंने तेजस्वी और संजय यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि परिवार की बेटियों और बहनों को अपने पिता को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए।
एक अन्य पोस्ट में रोहिणी ने लिखा कि उन्हें अपमानित किया गया, मारने के लिए चप्पल उठाई गई और उनका आत्मसम्मान ठेस पहुंची। उन्होंने बताया कि मजबूरी में उन्हें अपने रोते हुए माता-पिता और बहनों से अलग होना पड़ा और उनका मायका उनसे छीना गया।
रोहिणी ने तेजस्वी यादव के एक और करीबी सहयोगी रमीज पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने रमीज को “अपराधी मानसिकता वाला गैंगस्टर और हत्या के मामले का आरोपी” बताया। इस मामले पर लालू परिवार के किसी सदस्य की प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
केंद्रीय मंत्री एवं राजद प्रमुख के पूर्व सहयोगी जीतन राम मांझी के बेटे और राज्य मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि परिवार में लंबे समय से समस्याएं थीं। उन्होंने तेजस्वी यादव को सलाह दी कि थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएं, तभी वे लोगों के नेता बनने का सपना पूरा कर सकते हैं।
पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को केवल 25 सीटें मिलीं, जबकि इससे पहले यह दल 70 से अधिक सीटों के साथ सबसे बड़ा था। तेज प्रताप यादव को पार्टी से निकालने और उनके नए संगठन जनशक्ति जनता दल की हार जैसे घटनाक्रम ने भी पारिवारिक विवाद को बढ़ावा दिया।
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