“स्वर्ण समाज की अनदेखी पड़ी भारी तो 2027 में बदलेगा सत्ता का गणित”
शाहजहाँपुर। यूजीसी से जुड़े नए कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विरोध तेज़ हो गया है। ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ नेता हरिशरण बाजपेई ने शाहजहाँपुर में इस कानून पर कड़ी आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए प्रावधान शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत हैं और इससे स्वर्ण समाज के विद्यार्थियों के भविष्य पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
हरिशरण बाजपेई ने कहा कि शिक्षा समान अवसर उपलब्ध कराने का माध्यम है, लेकिन मौजूदा यूजीसी कानून के स्वरूप में स्वर्ण समाज के छात्रों के साथ अन्याय की आशंका स्पष्ट दिखाई देती है। उनके अनुसार यह कानून योग्यता आधारित अवसरों को सीमित करता है और सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया, तो इसका राजनीतिक प्रभाव भी सामने आएगा। बाजपेई ने कहा, “यदि स्वर्ण समाज ने 2027 के विधानसभा चुनाव में समर्थन वापस लिया, तो सत्ता का गणित बदल सकता है।”
बाजपेई ने यह भी आशंका जताई कि यूजीसी कानून की आड़ में छात्रों को अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और जटिलताओं में उलझाया जा सकता है, जिससे उनका शैक्षणिक और सामाजिक भविष्य प्रभावित होगा। ऐसी स्थिति में समाज को संगठित होकर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि यूजीसी कानून को लेकर सभी वर्गों के साथ व्यापक संवाद किया जाए और ऐसा संतुलित व पारदर्शी ढांचा तैयार किया जाए, जिससे किसी भी समाज के छात्रों के साथ भेदभाव न हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति में संतुलन और पारदर्शिता ही देश के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।
फिलहाल यूजीसी कानून को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है और यह मुद्दा समाज के विभिन्न वर्गों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
