मुंबई निकाय चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर सियासी हलचल, वर्षा गायकवाड के इस्तीफे की मांग तेज

मुंबई, 17 जनवरी । मुंबई निकाय चुनाव में कांग्रेस को अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन झेलना पड़ा है। चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद ही पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई और कांग्रेस नेताओं ने नैतिक आधार पर मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है।

वर्ष 2017 के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में कांग्रेस को 227 में से 31 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार यह संख्या घटकर 24 रह गई। खराब नतीजों के बाद गायकवाड आलोचनाओं के घेरे में आ गई हैं।

कांग्रेस की मुंबई इकाई के पूर्व अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने वर्षा गायकवाड से पद छोड़ने की मांग करते हुए कहा कि यह पार्टी का अब तक का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। उन्होंने उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। जगताप ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा,
“हमें बताया गया था कि टिकट सर्वेक्षण के आधार पर दिए गए हैं। मैंने उस समय आपत्ति नहीं की, लेकिन जब सर्वे रिपोर्ट मांगी तो वह दिखाई नहीं गई।”

हालांकि, कांग्रेस की मुंबई इकाई के मुख्य प्रवक्ता सचिन सावंत ने पार्टी के प्रदर्शन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जिन “प्रतिकूल परिस्थितियों” में चुनाव हुए, उन्हें देखते हुए कांग्रेस का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। सावंत के मुताबिक, पार्टी कार्यकर्ताओं ने सत्ताधारी गठबंधन के दबाव के बावजूद दृढ़ संकल्प के साथ चुनाव लड़ा।

इस चुनाव में कांग्रेस ने महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के घटक दलों के साथ गठबंधन नहीं किया था। पार्टी ने वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई)-गवई के साथ मिलकर 152 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सहयोगी दलों को एक भी सीट नहीं मिली।

चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 89 सीटें जीतकर बीएमसी में उद्धव ठाकरे परिवार के तीन दशक पुराने वर्चस्व को समाप्त कर दिया। शिवसेना को 29 सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी शिवसेना (उबाठा) ने 65 सीटों पर जीत दर्ज की।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह, एआईएमआईएम को आठ, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को तीन, समाजवादी पार्टी को दो और राकांपा (शरद पवार गुट) को एक सीट मिली।

कुल मिलाकर, चुनाव नतीजों ने न केवल कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष भी एक बार फिर सतह पर आ गया है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *