मालदा में मोदी ने शिवेंदु शेखर राय को दी श्रद्धांजलि, तृणमूल सांसद के पुत्र ने जताया संयमित नजरिया

मालदा/कोलकाता, 17 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मालदा में आयोजित जनसभा में स्वतंत्रता-पूर्व इतिहास के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धांजलि दी। मोदी ने 1947 में मालदा को भारत में बनाए रखने में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से जिले की पहचान सुरक्षित रही।

प्रधानमंत्री ने जनसभा की शुरुआत में कहा, “मैं सर्वप्रथम मालदा के महान सपूत शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही।” मोदी के इस बयान से श्रोताओं में मौजूद कई लोग चकित रह गए।

इस अवसर पर भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने पहले स्मृति चिन्ह के रूप में मोदी को शिवेंदु शेखर राय की फ्रेम की हुई तस्वीर भेंट की। यह तस्वीर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रधानमंत्री को दी। इस बात ने राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया क्योंकि शिवेंदु शेखर राय के पुत्र सुखेन्दु शेखर राय वर्तमान में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य हैं।

स्वतंत्रता-पूर्व मालदा के प्रख्यात दीवानी वकील और हिंदू महासभा नेता शिवेंदु शेखर राय राजनीतिक विचारधाराओं से परे अपनी लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे। विश्वविद्यालय के दिनों से ही वे शिक्षाविद और महासभा नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घनिष्ठ सहयोगी रहे और विभाजन वार्ता के दौरान पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सुखेन्दु शेखर राय ने बताया कि जब मालदा को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की संभावना बनी, तो उनके पिता ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के पिता एन सी चटर्जी से संपर्क कर इस कदम को चुनौती देने की कोशिश शुरू की। चूंकि एन सी चटर्जी दक्षिण बंगाल और कोलकाता की सुरक्षा में व्यस्त थे, शिवेंदु शेखर राय ने इसके बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संपर्क किया। श्यामा प्रसाद ने उन्हें आगे की कार्रवाई की सलाह दी और बंगाल सीमा आयोग के समक्ष मालदा का ऐतिहासिक, जनसांख्यिकीय और प्रशासनिक मामला व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने में सहयोग किया।

राज्यसभा सदस्य सुखेन्दु शेखर राय ने कहा, “यह इतिहास है और इसे नकारने की कोई गुंजाइश नहीं है। मालदा भारत में इसलिए बना क्योंकि मेरे पिता ने इसे भारत में बनाए रखने के आंदोलन का नेतृत्व किया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दल इतिहास को अपने हिसाब से ढाल सकते हैं, लेकिन उनके पिता की भूमिका के प्रति प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि उनके लिए गर्व का विषय है।

सुखेन्दु ने कहा, “सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि मेरे भाई-बहन, रिश्तेदार और परिवार के सभी सदस्य गर्व महसूस करते हैं। सिर्फ इसलिए कि मैं तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हूं, क्या मुझे दुखी होना चाहिए? यह तो सरासर बेतुका होगा।” उन्होंने मोदी द्वारा किए गए जिक्र को समकालीन राजनीतिक संदेश के बजाय लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक मान्यता के रूप में देखा।

सुखेन्दु शेखर राय ने इस अवसर पर जोर दिया, “यह मालदा के विभाजन काल का ऐसा अध्याय है जिसे आज के राजनीतिक मतभेदों से परे याद रखा जाना चाहिए।”

प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम न केवल इतिहास की सराहना के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में ऐतिहासिक घटनाओं को याद दिलाने वाला संदेश भी माना जा रहा है।

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