महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव: भाजपा के कांग्रेस व एआईएमआईएम से चुनाव बाद गठबंधन पर बवाल, फडणवीस ने कार्रवाई के संकेत दिए

भाजपा के कांग्रेस व एआईएमआईएम से चुनाव बाद गठबंधन पर बवाल, फडणवीस ने कार्रवाई के संकेत दिए

मुंबई, सात जनवरी ।महाराष्ट्र की दो नगर पालिका परिषदों में भाजपा द्वारा कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ चुनाव बाद गठबंधन किए जाने से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के गठबंधन पार्टी नेतृत्व द्वारा अनुमोदित नहीं थे और इन्हें अनुशासनहीनता करार देते हुए संबंधित स्थानीय नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सत्तारूढ़ महायुति की सहयोगी शिवसेना ने भी इस कदम को ‘गठबंधन धर्म’ के खिलाफ बताया है।

20 दिसंबर को हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद भाजपा ने ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर पालिका परिषद में कांग्रेस और अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाडी’ के नाम से गठबंधन बनाया और परिषद का नेतृत्व हासिल कर लिया। इससे पहले शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) 60 सदस्यीय परिषद में 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से चार सीट पीछे रह गई थी। भाजपा को 14, कांग्रेस को 12, राकांपा को चार और दो सीट निर्दलीयों को मिली थीं। एक निर्दलीय के समर्थन से भाजपा-कांग्रेस-राकांपा गठबंधन ने 32 का आंकड़ा पार कर बहुमत साबित किया।

इस घटनाक्रम से असहज हुई कांग्रेस ने अंबरनाथ नगर पालिका परिषद के अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा के साथ गठबंधन का निर्णय राज्य नेतृत्व की अनुमति के बिना लिया गया।

इसी तरह, अकोला जिले की अकोट नगर पालिका परिषद में भाजपा ने एआईएमआईएम और अन्य दलों के साथ ‘अकोट विकास मंच’ के नाम से गठबंधन कर सत्ता में भागीदारी की। 35 सदस्यीय परिषद में भाजपा को 11 और एआईएमआईएम को दो सीट मिली थीं, जबकि अन्य दलों के समर्थन से गठबंधन की संख्या बढ़कर 25 हो गई। भाजपा की माया धुले महापौर चुनी गई हैं।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने एक समाचार चैनल से कहा, “कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ कोई भी गठबंधन स्वीकार्य नहीं है। यदि स्थानीय स्तर पर किसी ने अपनी मर्जी से ऐसा किया है, तो यह अनुशासनहीनता है और कार्रवाई होगी।” उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

शिवसेना (उबाठा) और सत्तारूढ़ शिवसेना दोनों ने भाजपा की आलोचना की है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने इसे सत्ता के लिए अवसरवाद बताया, जबकि शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इसे ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ के नारे के विपरीत करार दिया।

वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि यह गठबंधन स्थानीय विकास और कथित भ्रष्टाचार से मुक्ति के उद्देश्य से किया गया। अकोट में भाजपा का दावा है कि एआईएमआईएम के कुछ पार्षदों ने पार्टी की विचारधारा से असहमति जताते हुए गठबंधन का समर्थन किया है, हालांकि एआईएमआईएम नेतृत्व ने भाजपा से किसी भी औपचारिक समझौते से इनकार किया है।

इन घटनाओं ने महाराष्ट्र में नगर निकाय राजनीति में गठबंधन की मर्यादाओं और दलों की वैचारिक स्थिरता पर नई बहस छेड़ दी है।

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