नयी दिल्ली, 30 जनवरी – कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर नया कानून लाए जाने का विरोध करते हुए शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसा कोई कानून नहीं चाहते, जिसके साथ महात्मा गांधी का नाम जुड़ा हो। पार्टी ने इसे गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण भारत के अधिकारों पर हमला करार दिया।
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत अपने पुराने मुख्यालय 24 अकबर रोड से गांधी स्मृति तक यात्रा निकालने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने कुछ दूरी पर ही यात्रा को रोक दिया।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश, पार्टी के कोषाध्यक्ष अजय माकन, दिल्ली प्रभारी काजी मोहम्मद निजामुद्दीन, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
इस मौके पर जयराम रमेश ने कहा,
“मोदी सरकार ने बुलडोजर चलाकर मनरेगा अधिनियम को रद्द कर दिया। मनरेगा एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कानून था, जिसे सितंबर 2005 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था।”
उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार की कानूनी गारंटी मिली थी और इस कानून से पंचायतें सशक्त हुई थीं।
रमेश ने आरोप लगाया,
“इस कानून को इसलिए खत्म किया गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नहीं चाहते कि महात्मा गांधी के नाम से जुड़ा कोई कानून लंबे समय तक चले और लोगों को उनका अधिकार मिलता रहे।”
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी मोदी सरकार द्वारा मनरेगा के खिलाफ उठाए गए कदम का डटकर विरोध करेगी।
उन्होंने कहा,
“जो सरकार किसानों, मजदूरों और युवाओं का अपमान करती है, वह ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं रह सकती।”
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि मनरेगा की लड़ाई देश के गरीब और वंचित नागरिकों के रोजगार और अधिकारों की लड़ाई है।
उन्होंने कहा,
“कांग्रेस सरकार के दौरान गरीबों को सम्मान के साथ रोजगार का अधिकार मिला था—अपने गांव में रहकर काम करने का अवसर मिला, जिससे गांवों का विकास हुआ। नरेन्द्र मोदी सरकार ने उस अधिकार को खत्म कर दिया है।”
गौरतलब है कि संसद के पिछले सत्र में मनरेगा के स्थान पर ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक’ पारित किया गया था, जो अब कानून का रूप ले चुका है। कांग्रेस ने इस नए कानून को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं और इसके खिलाफ देशभर में आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है।
