मनरेगा श्रमिकों की महापंचायत ने राष्ट्रपति से ‘वीबी-जी राम जी’ कानून वापस लेने की मांग की

बेंगलुरु। कर्नाटक में मनरेगा श्रमिकों की एक विशाल महापंचायत ने राष्ट्रपति से विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम को वापस लेने और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान लागू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को तत्काल बहाल करने की मांग की है। इस संबंध में राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया।

यह ज्ञापन ‘मनरेगा रक्षा गठबंधन–कर्नाटक’ की ओर से राष्ट्रपति को संबोधित किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि दो फरवरी, 2026 को राज्य के विभिन्न हिस्सों से 10,000 से अधिक ग्रामीण कृषि श्रमिक—जिनमें महिलाएं, दलित, भूमिहीन मजदूर और छोटे किसान शामिल हैं—बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित महापंचायत में एकत्र हुए।

ज्ञापन में कहा गया, “अत्यंत दुख और चिंता के साथ हम यह पत्र लिख रहे हैं। हम फ्रीडम पार्क से यह ज्ञापन तैयार कर रहे हैं, जहां यह महापंचायत आयोजित हो रही है। हम आपसे इस विकट स्थिति में तत्काल हस्तक्षेप करने का विनम्र अनुरोध करते हैं।”

महापंचायत में कहा गया कि मनरेगा को लागू हुए 20 वर्ष हो चुके हैं और इसका मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी पर अपने ही गांवों में काम उपलब्ध कराना था। इसके साथ ही स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा भी इस कानून का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा है।

ज्ञापन में कहा गया कि जल संचयन सुनिश्चित करने, मृदा संरक्षण और किसानों के खेतों में अधिक रोजगार सृजित करने के लिए गांवों के तालाबों, नहरों और नालों से गाद निकालना इस योजना का अभिन्न हिस्सा था, जिससे दीर्घकाल में ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलती थी।

ज्ञापन के अनुसार, मनरेगा के तहत देशभर में 26 करोड़ श्रमिक पंजीकृत हैं, जिनमें से 1.79 करोड़ अकेले कर्नाटक से हैं। इनमें आधे से अधिक महिलाएं हैं, जबकि लगभग 30 प्रतिशत दलित और आदिवासी समुदाय से आते हैं।

श्रमिक संगठनों ने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर ग्रामीणों को रोजगार देने वाले इस कानून को हर वर्ष और मजबूत किया जाना चाहिए था, लेकिन पिछले 11 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इसे कमजोर किया है। ज्ञापन में कहा गया कि केंद्रीय नियंत्रण कड़ा किया गया और पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं दी गई, जिसके कारण मजदूरी भुगतान में लगातार देरी होती रही।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने बिना किसी पूर्व परामर्श के मनरेगा को समाप्त कर दिया और उसकी जगह वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू किया, जिसे संसद में जल्दबाजी में पारित किया गया। श्रमिक संगठनों का दावा है कि यह नया कानून मनरेगा में मौजूद समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि इससे भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका है।

महापंचायत ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें, वीबी-जी राम जी अधिनियम को वापस लिया जाए और मनरेगा को उसकी मूल भावना के साथ पुनः लागू किया जाए, ताकि ग्रामीण गरीबों और श्रमिकों की आजीविका सुरक्षित रह सके।

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