मनरेगा थी ‘लूट की गारंटी’, विकसित भारत–जी राम जी में एक रुपये के भी भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं: किरेन रीजीजू

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी द्वारा ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना को लेकर आयोजित कार्यशाला के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए

लखनऊ, 13 जनवरी । केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने जनता से ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना को लेकर हो रहे कथित दुष्प्रचार के प्रभाव में न आने का आह्वान करते हुए कहा कि मनरेगा के विपरीत नए कानून में एक रुपये के भी भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) दरअसल “लूट की गारंटी” बन चुका था।

रीजीजू ने लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी द्वारा ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना को लेकर आयोजित कार्यशाला के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मनरेगा में ऐसी व्यवस्थाएं थीं, जिनका दुरुपयोग कर कुछ लोग तिकड़मों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर लेते थे। उन्होंने दावा किया कि नई योजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि भ्रष्टाचार की कोई संभावना नहीं बचे।

केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष द्वारा मनरेगा को समाप्त कर ‘विकसित भारत–जी राम जी’ लागू किए जाने के विरोध का जिक्र करते हुए कहा, “दुष्प्रचार करने से कुछ नहीं होगा। जब संशोधित नागरिकता कानून लाया गया था, तब कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने झूठ फैलाकर मुसलमानों को गुमराह करने की कोशिश की थी कि उनकी नागरिकता छिन जाएगी। लेकिन क्या किसी मुसलमान की नागरिकता गई? विकसित भारत–जी राम जी को लेकर भी ऐसा ही दुष्प्रचार किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत–जी राम जी’ अब कानून बन चुका है, इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके सकारात्मक बदलाव जल्द ही जमीन पर दिखाई देंगे। मनरेगा खत्म कर महात्मा गांधी का नाम हटाने की साजिश के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रीजीजू ने कहा, “हम नाम पर नहीं, काम पर विश्वास करते हैं। जो कानून भ्रष्टाचार का साधन बन चुका था, उस पर बार-बार चर्चा क्यों की जाए? पुराने कानून में भ्रष्टाचार रोकने की कोई प्रभावी व्यवस्था ही नहीं थी।”

रीजीजू ने कहा कि नए कानून में पूरी व्यवस्था को डिजिटल बनाया गया है। ‘जोन मैपिंग’ और ‘सैटेलाइट मैपिंग’ के जरिए हर परियोजना की नीचे से ऊपर तक लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि एक रुपये की भी गड़बड़ी न हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि मनरेगा में राज्यों को जरूरत के मुताबिक धनराशि समय पर नहीं मिल पाती थी। इसके विपरीत, ‘विकसित भारत–जी राम जी’ कानून में रोजगार गारंटी की अवधि को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है और यदि काम उपलब्ध कराने में देरी होती है तो हर्जाना वसूलने का भी प्रावधान किया गया है।

रीजीजू ने कहा कि यह योजना उत्तर प्रदेश के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और सबसे अधिक आबादी तथा सर्वाधिक गांव उत्तर प्रदेश में हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘विकसित भारत–जी राम जी’ के लागू होने से सबसे बड़ा और स्पष्ट बदलाव उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेगा।

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