मणिपुर: भाजपा ने विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया

नयी दिल्ली, दो फरवरी । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसदीय बोर्ड ने मणिपुर में पार्टी विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए होने वाली बैठक के लिए पार्टी महासचिव तरुण चुघ को सोमवार को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया।

भाजपा का यह कदम पूर्वोत्तर राज्य में एक लोकप्रिय सरकार के संभावित गठन का संकेत माना जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब मणिपुर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायक भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के बुलावे पर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की मौजूदा कानूनी अवधि अगले सप्ताह समाप्त हो रही है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने एक बयान में कहा, “भाजपा संसदीय बोर्ड ने मणिपुर में पार्टी विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।”

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद पहली बार 13 फरवरी, 2025 को छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। अगस्त 2025 में इसे और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।

मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, हालांकि इसे फिलहाल निलंबित रखा गया है। भाजपा विधायक दल की बैठक मंगलवार को होने की संभावना है, हालांकि बैठक के स्थान को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, मणिपुर के करीब 20 विधायक रविवार रात दिल्ली पहुंचे, जबकि शेष विधायक सोमवार को भाजपा नेतृत्व के निर्देश पर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। दिल्ली पहुंचने वाले नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, वर्तमान में स्थगित विधानसभा के अध्यक्ष सत्यब्रता सिंह और पूर्व मंत्री वाई खेमचंद सिंह शामिल हैं। भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष ए शारदा देवी भी दिल्ली में मौजूद हैं।

सूत्रों ने बताया कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले कुछ महीनों में मेइती और कुकी समुदायों से जुड़े पार्टी विधायकों, सहयोगी दलों नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ), तथा कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं, ताकि यह आकलन किया जा सके कि राज्य में लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल हैं या नहीं।

सूत्रों के अनुसार, 14 दिसंबर 2025 को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष और पार्टी के पूर्वोत्तर मामलों के समन्वयक संबित पात्रा ने दिल्ली में एक ही छत के नीचे मेइती और कुकी समुदायों से आने वाले भाजपा विधायकों से मुलाकात की थी।

मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के 37 विधायक हैं। पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 32 सीटें जीती थीं, बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के छह विधायकों में से पांच भाजपा में शामिल हो गए, जिससे उसकी संख्या बढ़कर 37 हो गई।

इसके अलावा विधानसभा में नेशनल पीपुल्स पार्टी के छह, नगा पीपुल्स फ्रंट के पांच, कांग्रेस के पांच, कुकी पीपुल्स अलायंस के दो, जनता दल (यूनाइटेड) का एक और तीन निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट निवर्तमान विधायक के निधन के कारण रिक्त है।

राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने शांति बहाल करने और सामान्य स्थिति लौटाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें सुरक्षा बलों से लूटे गए हथियारों को वापस करने के लिए आत्मसमर्पण की अपील भी शामिल है।

उल्लेखनीय है कि मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा मई 2023 में उस समय शुरू हुई थी, जब पहाड़ी जिलों में मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ निकाला गया था। इस हिंसा में अब तक करीब 260 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

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