भारत को ‘विनाशकारी’ कम्युनिस्ट विचारधारा से मुक्त होना होगा : अमित शाह

रायपुर, 8 फरवरी  । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि देश को जल्द से जल्द ‘विनाशकारी’ कम्युनिस्ट विचारधारा से छुटकारा पाने की आवश्यकता है। उन्होंने नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों का सरकार ‘लाल कालीन’ बिछाकर स्वागत करेगी।

नवा रायपुर में ‘ऑर्गनाइजर वीकली’ द्वारा आयोजित ‘छत्तीसगढ़@25 : शिफ्टिंग द लेंस’ विषयक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि माओवादी समस्या को केवल विकास की कमी या कानून-व्यवस्था से जोड़कर देखना सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वामपंथी उग्रवाद मूलतः एक विचारधारा से प्रेरित चुनौती है।

गृह मंत्री ने कहा कि देश की जनता को कम्युनिस्ट विचारधारा की सच्चाई को समझना चाहिए। उन्होंने कहा, “जहां-जहां कम्युनिस्ट सत्ता में रहे, वे विकास नहीं ला सके। यह विचारधारा विनाश की विचारधारा है और भारत को इससे तुरंत छुटकारा पाना आवश्यक है।”

अमित शाह ने दावा किया कि लोकतांत्रिक राजनीति में अब कम्युनिस्ट विचारधारा का कोई ठोस अस्तित्व नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में इसका प्रभाव समाप्त हो चुका है, जबकि केरल में भी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है और तिरुवनंतपुरम से इसके संकेत मिल रहे हैं।

माओवादियों से हथियार डालने की अपील दोहराते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती। उन्होंने आश्वासन दिया कि आत्मसमर्पण करने वालों का सम्मानपूर्वक पुनर्वास किया जाएगा।

वामपंथी उग्रवाद पर तीखा हमला बोलते हुए शाह ने कहा कि माओवादी समस्या का गलत आकलन करना भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने उन विचारकों की आलोचना की जो इसे केवल विकास या कानून-व्यवस्था की समस्या बताते हैं।

अपने तर्कों के समर्थन में शाह ने 1980 के दशक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय बस्तर से भी अधिक पिछड़े 100 से ज्यादा जिले देश में मौजूद थे, लेकिन वहां माओवादी समस्या नहीं फैली। उन्होंने कहा कि माओवादी आंदोलन का उभार विकास या कानून-व्यवस्था से नहीं, बल्कि विचारधारा से जुड़ा है।

गृह मंत्री ने बताया कि माओवादी समस्या के उभरने से पहले बस्तर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था कई अन्य राज्यों के जिलों से बेहतर थी। उन्होंने कहा कि माओवाद भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ है, जहां हर समस्या का समाधान संवाद और लोकतंत्र से निकलता है, न कि बंदूक की नली से।

अमित शाह ने कहा कि यदि बस्तर माओवादी हिंसा से प्रभावित नहीं होता तो वह देश के सबसे विकसित जिलों में शामिल होता। नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को मुक्त कराया जा चुका है और 31 मार्च तक इस समस्या को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है।

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