भारतीय उत्पाद उच्च गुणवत्ता के पर्याय होने चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली, 25 जनवरी — प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्योग जगत और स्टार्टअप से गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा विनिर्माण में उत्कृष्टता को मानक बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों की पहचान सर्वोत्तम गुणवत्ता से होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर समझौते की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 130वें संस्करण में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पर पूरी दुनिया की नजरें हैं और ऐसे समय में गुणवत्ता को प्राथमिकता देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उद्योग जगत से ऐसे उत्पाद तैयार करने का आह्वान किया, जिनमें किसी प्रकार की कमी न हो।

मोदी ने कहा, “हम जो कुछ भी निर्मित करते हैं, उसकी गुणवत्ता में निरंतर सुधार करने का संकल्प लें। चाहे वह वस्त्र हों, प्रौद्योगिकी हो, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हों या पैकेजिंग—हर भारतीय उत्पाद ‘सर्वोत्तम गुणवत्ता’ का पर्याय होना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने भारत की स्टार्टअप यात्रा का उल्लेख करते हुए उन युवाओं की सराहना की, जिन्होंने वर्ष 2016 में शुरू हुए स्टार्टअप आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप परिवेशी तंत्र बन चुका है और भारतीय स्टार्टअप नवाचार के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि भारतीय स्टार्टअप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, परिवहन, हरित हाइड्रोजन और जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते और अत्याधुनिक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि लगभग हर क्षेत्र में आज कोई न कोई भारतीय स्टार्टअप सक्रिय है।

प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप से जुड़े युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश की विकास यात्रा की महत्वपूर्ण धुरी हैं और उनके प्रयास भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

मोदी ने देशवासियों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि “होती है, चलती है, चल जाएगा” का युग अब समाप्त हो चुका है और अब गुणवत्ता ही हमारा एकमात्र मंत्र होना चाहिए—“गुणवत्ता, गुणवत्ता और सिर्फ गुणवत्ता।”

प्रधानमंत्री ने ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ के अपने आह्वान को दोहराते हुए कहा कि इसी दृष्टिकोण से भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के साथ-साथ विनिर्माण प्रक्रिया को टिकाऊ बनाना है।

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