नयी दिल्ली, 18 जनवरी । राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने रविवार को आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में नहीं है या पूर्ण बहुमत में नहीं है, वहां उसकी रणनीति पहले अन्य दलों के साथ गठबंधन कर सत्ता में आने और बाद में सहयोगी दलों को हाशिये पर धकेलने की होती है।
निर्दलीय सांसद सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “भाजपा की राजनीतिक रणनीति साफ है—जहां बहुमत नहीं है, वहां अन्य राजनीतिक दलों से गठबंधन करो, सत्ता में आओ और फिर उन्हें हाशिये पर डाल दो।” उन्होंने दावा किया कि यह रणनीति बिहार में सफल रही और अब महाराष्ट्र में भी इसी मॉडल को लागू किया जा रहा है।
सिब्बल की यह टिप्पणी महाराष्ट्र में हाल में हुए निकाय चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद आई है। चुनाव परिणामों के अनुसार, 29 नगर निकायों की कुल 2,869 सीटों में से भाजपा ने 1,425 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की और मुंबई तथा पुणे सहित एक दर्जन से अधिक नगर निगमों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
भाजपा ने 227 सदस्यीय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में 89 सीटें जीतकर इस नगर निकाय पर ठाकरे परिवार के लगभग तीन दशक पुराने दबदबे को समाप्त कर दिया। वहीं भाजपा की सहयोगी शिवसेना को 29 सीटें मिलीं, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) ने 65 सीटें जीतीं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह सीटें मिलीं।
कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ते हुए बीएमसी में 24 सीटें हासिल कीं। इसके अलावा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को आठ, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को तीन, समाजवादी पार्टी को दो और राकांपा (शरद चंद्र पवार) को एक सीट मिली।
अन्य नगर निगमों में भी भाजपा का दबदबा देखने को मिला। पार्टी नवी मुंबई में 65 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि कल्याण-डोंबिवली में 50, मीरा-भायंदर में 78, नासिक में 72, पनवेल में 55, पुणे में 119, पिंपरी-चिंचवड में 84, सोलापुर में 87, छत्रपति संभाजीनगर में 57, नांदेड में 45 और नागपुर में 102 सीटें जीतकर भाजपा ने बढ़त बनाई।
पुणे नगर निगम चुनाव में भाजपा ने पवार परिवार के गढ़ में सेंध लगाते हुए 119 सीटें जीतीं। अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा 27 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि राकांपा (शरद चंद्र पवार) को तीन और कांग्रेस को 15 सीटों से संतोष करना पड़ा।
सिब्बल ने इन नतीजों के संदर्भ में भाजपा की गठबंधन राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी सफलता के बाद सहयोगी दलों की भूमिका सीमित कर देना पार्टी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
