कोलकाता, 24 मार्च । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के एक पत्र पर कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुहर लगने से यह बात संदेह से परे साबित हो गई है कि पर्दे के पीछे से आयोग को कौन चला रहा है।
निर्वाचन आयोग के मार्च 2019 के एक पत्र पर भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई की मुहर लगी पाए जाने के बाद सोमवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार अभियान शुरू करने के लिए उत्तरी बंगाल के बागडोगरा रवाना होने से पहले कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा,
“निर्वाचन आयोग की अधिसूचना पर भाजपा की मुहर लगी होने से यह स्पष्ट हो गया है कि पर्दे के पीछे से आयोग को कौन चला रहा है। पोल खुल चुकी है।”
उन्होंने अपने दावों के समर्थन में इस विवाद से संबंधित एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर भी दिखाई। मुख्यमंत्री ने आयोग का नाम लिए बिना कहा कि पर्दे के पीछे से खेल खेलने के बजाय खुलकर सामने आकर मुकाबला करना चाहिए।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा नंदीग्राम के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) का तबादला भवानीपुर करने के फैसले से राजनीतिक साजिश की बू आ रही है। उन्होंने परोक्ष रूप से दावा किया कि संबंधित अधिकारी भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमवार को निर्वाचन आयोग ने राज्य के 73 निर्वाचन अधिकारियों का तबादला कर दिया, जबकि इससे पहले लगभग 70 वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया था, जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे पद शामिल थे। उन्होंने कहा कि अब स्पष्ट हो गया है कि इन फैसलों के पीछे किस पार्टी की भूमिका है।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने निर्वाचन आयोग द्वारा इसे ‘लिपिकीय गलती’ बताए जाने को खारिज करते हुए कहा कि यह जानबूझकर राजनीतिक उद्देश्य से किया गया कदम है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित पत्र केवल केरल के लिए नहीं, बल्कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को संबोधित था।
ममता बनर्जी ने कहा कि इस विवाद के बाद चुनाव कराने में निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर “आयोग की मदद से एक ही पार्टी का शासन लागू करने की कोशिश” के खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरक मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी से लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि उनका नाम सूची में शामिल है या हटाया गया है, क्योंकि सूची की प्रतियां अभी तक जिला, ब्लॉक या बूथ कार्यालयों में प्रदर्शित नहीं की गई हैं।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
