नई दिल्ली, 11 मार्च । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए संकल्प को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि विपक्षी दलों ने अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बेहद अफसोसजनक है।
लोकसभा में विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि सदन में किसी भी सदस्य को नियमों के विरुद्ध बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय से असहमति हो सकती है, लेकिन उनका फैसला अंतिम होता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया जाता। शाह ने कहा कि राहुल गांधी स्वयं ही कई बार चर्चा में भाग नहीं लेते। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा लाए गए कई महत्वपूर्ण विधेयकों का उल्लेख करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने उन पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया।
गृह मंत्री ने दावा किया कि पिछले वर्ष शीतकालीन सत्र के दौरान राहुल गांधी जर्मनी की यात्रा पर थे। शाह ने कहा, “जब-जब महत्वपूर्ण सत्र होता है, उनका विदेश दौरा होता है। जब आप विदेश में होते हैं तो आप सदन में कैसे बोलेंगे। यहां वीडियो कॉन्फ्रेंस का कोई प्रावधान नहीं है। अगर ऐसा होता तो उन्हें भी बोलने का मौका दिया जा सकता था।”
शाह ने कहा कि विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल खड़ा किया जाता है तो इससे विश्व स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख प्रभावित होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि बजट सत्र के पिछले चरण के दौरान लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में ऐसा माहौल बना दिया गया था कि उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई थी। शाह ने कहा कि यदि कोई सदस्य सदन के नियमों के खिलाफ बोलता है तो अध्यक्ष को उसे रोकने और आवश्यकता पड़ने पर सदन से बाहर करने का अधिकार है।
गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संसद के दोनों सदनों ने भारतीय लोकतंत्र की नींव को मजबूत किया है, लेकिन आज विपक्ष के रवैये से उसकी साख पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद आपसी विश्वास से चलती है और पक्ष तथा विपक्ष दोनों के लिए अध्यक्ष सदन के संरक्षक होते हैं।
शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने विपक्ष में रहते हुए भी कभी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया और हमेशा इस पद की गरिमा को बनाए रखने का प्रयास किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन कोई मेला नहीं है, बल्कि यह नियमों और परंपराओं के अनुसार चलने वाली संस्था है, इसलिए सभी सदस्यों को उसका पालन करना चाहिए।
