नई दिल्ली/जयपुर, 1 अक्टूबर – :दशहरे के ठीक एक दिन पहले हुई अचानक बारिश ने उत्तर भारत के कई इलाकों में त्योहारी तैयारियों को तगड़ा झटका दे दिया है। दिल्ली के तीतारपुर और जयपुर की ‘रावण मंडी’ जैसे प्रमुख पुतला निर्माण केंद्रों में बारिश ने सैकड़ों रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों को भीगा दिया, जिससे न केवल कारीगरों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो गई, बल्कि उनकी कमाई की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया।
पानी में बह गया साल भर का इंतजार
दिल्ली के तीतारपुर बाजार, जिसे एशिया का सबसे बड़ा रावण पुतला बाजार माना जाता है, वहां के अनुभवी कारीगर महेंद्र पाल की आंखों में मायूसी साफ झलक रही थी। पिछले 50 वर्षों से पुतला निर्माण में लगे पाल ने इस बार 25 से अधिक पुतले बनाए थे, जिनमें से 10 से ज्यादा बारिश की भेंट चढ़ गए।
“हम साल भर इस मौसम का इंतजार करते हैं। एक महीने से दिन-रात मेहनत की, लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया। सरकार से अपील है कि हमें भी प्राकृतिक आपदा जैसी राहत दी जाए।” – महेंद्र पाल, पुतला निर्माता
जयपुर में भी वही हाल, बड़े पुतले बर्बाद
जयपुर के गोपालपुरा बाइपास स्थित रावण मंडी में भी हालत कुछ अलग नहीं हैं। सड़कों के किनारे भीगे पुतलों के धड़, हाथ-पैर और टूटे बांस की चौखटें बिखरी पड़ी हैं। वहां काम करने वाले कारीगर गोर्धन ने बताया कि उनके सभी बड़े पुतले खराब हो गए हैं और अब केवल टेंट में सुरक्षित छोटे पुतलों को ही बेचने की उम्मीद बची है।
“बड़े पुतलों को एक दिन में दोबारा बनाना मुमकिन नहीं है। अब छोटे पुतलों को ही बचा रहे हैं।” – गोर्धन, जयपुर के पुतला निर्माता
नुकसान लाखों में, उधार में डूबे कारीगर
दिल्ली के कारीगर सतपाल राय ने बताया कि उनका नुकसान लाखों रुपये में पहुंच गया है। जयपुर के बजू ने बताया कि उन्होंने करीब 200 पुतले बनाने के लिए एक लाख रुपये उधार लिया था, लेकिन अब वे पूरी तरह से घाटे में हैं।
“लाख रुपये उधार लेकर काम शुरू किया था, अब दशहरा की कमाई भी नहीं दिख रही।” – बजू, जयपुर
तीतारपुर के विक्रेता अजय ने कहा कि उन्होंने 51 पुतले बनाए थे, लेकिन बारिश के कारण केवल 22 ही सही-सलामत कार्यक्रम स्थलों तक पहुंच सके। बाकी को अब जैसे-तैसे सुधारने की कोशिश की जा रही है।
“त्योहार हमारे लिए बर्बाद हो गया। अब जो बचा है, उसी से कुछ उम्मीद है।” – अजय, तीतारपुर
बाजारों में टूटी उम्मीद, मोलभाव में जुटे खरीदार
बारिश से प्रभावित पुतला बाजारों में अब भी खरीदार घूमते नजर आ रहे हैं। कुछ टूटे-फूटे पुतलों पर मोलभाव कर रहे हैं, तो कुछ अब भी सबसे आकर्षक पुतले की तलाश में जुटे हैं। लेकिन कारीगरों के लिए यह दृश्य निराशाजनक है।
आर्थिक सहायता की मांग, प्रशासन से अपील
पुतला निर्माताओं ने जिला प्रशासन, राज्य सरकारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि जैसे प्राकृतिक आपदाओं में किसानों को मुआवजा दिया जाता है, वैसे ही उन्हें भी दशहरे के इस संकट में राहत दी जानी चाहिए।
