उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर का खजाना धनतेरस के दिन खोला गया, जिससे श्रद्धालुओं और प्रशासन के बीच वर्षों से बनी रहस्य की परतें हट गईं। यह कमरा लगभग 54 साल से बंद था और इसे लेकर आम धारणा थी कि इसमें सोना, चांदी और कीमती रत्नों का खजाना छिपा हुआ है। लेकिन जब शनिवार को मंदिर परिसर स्थित इस खजाने का कमरा खोला गया, तो जो कुछ अंदर मिला, उसने सभी को चौंका दिया।
ताला खोलते ही कमरे से सीलन की तेज गंध और धूल की मोटी परतें बाहर आने लगीं। दीवारें पूरी तरह धूल से ढकी थीं और फर्श पर पानी जमा था। जैसे ही टीम कमरे के अंदर दाखिल हुई, अचानक फर्श पर हलचल हुई। टॉर्च की रोशनी में सामने दो सांप नजर आए, जिससे वहां मौजूद प्रशासनिक और मंदिर के अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। तुरंत वन विभाग को सूचित किया गया और टीम ने दोनों सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
करीब तीन घंटे की गहन छानबीन के बाद टीम को कमरे में से कुछ चांदी के पात्र और बर्तन मिले हैं। जिन उम्मीदों के साथ खजाना खोला गया था, वो पूरी तरह अधूरी रह गईं। ना कोई सोना मिला, ना रत्न, और ना ही किसी खास ऐतिहासिक वस्तु के संकेत।
सीओ सदर संदीप कुमार ने जानकारी दी कि अभी तक जो भी सामग्री मिली है, वह सीमित है और खजाने की जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। फिलहाल इस कमरे को दोबारा सील कर दिया गया है और आगे उच्च अधिकारियों के निर्देश के अनुसार अगली कार्रवाई की जाएगी।
यह कमरा कोर्ट के आदेश और मंदिर की हाईपावर्ड कमेटी के फैसले के बाद खोला गया था। सुरक्षा के लिए मौके पर पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर समिति के सदस्य और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद थे।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में इस खजाने को लेकर वर्षों से जिज्ञासा और रोमांच था, लेकिन परिणाम अपेक्षाओं से बहुत अलग निकले। अब आगे के निरीक्षण में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कमरा अपनी चुप्पी तोड़ेगा या रहस्य और मायूसी की परत में ही दफन रह जाएगा।
