बसंत पंचमी पर भोजशाला में पूजा–नमाज को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति, दोनों समुदायों के लिए तय हुआ समय

नयी दिल्ली, 22 जनवरी । उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर में बसंत पंचमी के अवसर पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदू समुदाय को पूजा–अर्चना की अनुमति दी है, जबकि मुस्लिम समुदाय को अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को पहले से उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, दोनों समुदायों से परस्पर सम्मान बनाए रखने और कानून व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की गई।

पीठ ने कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और राज्य के महाधिवक्ता के सुझाव के अनुसार, नमाज के निर्धारित समय के दौरान परिसर में मुस्लिम समुदाय के लिए एक अलग और विशेष स्थान उपलब्ध कराया जाए। इसी प्रकार, बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू समुदाय को पारंपरिक अनुष्ठानों के लिए अलग स्थान देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

न्यायालय ने जिला प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन आगंतुकों के लिए निशुल्क पास जारी कर सकता है या किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अन्य उपयुक्त उपाय कर सकता है, ताकि धार्मिक रस्में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों।

गौरतलब है कि हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है। एएसआई की 7 अप्रैल 2003 की व्यवस्था के तहत यहां मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की परंपरा चली आ रही है।

यह आदेश ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में बसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को विशेष पूजा की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी थी कि एएसआई के 2003 के आदेश में उस स्थिति का समाधान नहीं है, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है।

वहीं मस्जिद समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अदालत को बताया कि शुक्रवार की नमाज दोपहर एक से तीन बजे के बीच होती है और उसके बाद परिसर खाली किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नमाज के लिए आने वाले लोगों की अनुमानित संख्या जिला प्रशासन को दी जाएगी।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की उस अपील का भी निस्तारण कर दिया, जिसमें भोजशाला परिसर के ‘वैज्ञानिक सर्वेक्षण’ को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि एएसआई की सीलबंद रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और संबंधित पक्षों को उस पर आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया जाए।

अंत में, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक सभी पक्ष यथास्थिति बनाए रखें और एएसआई के मौजूदा आदेशों का पालन करते रहें।

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