नयी दिल्ली, छह जनवरी । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित मनमानी और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर की शुरुआत से ही निर्वाचन आयोग ने औपचारिक लिखित आदेशों के बजाय व्हाट्सएप संदेशों और वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए मौखिक निर्देशों के माध्यम से जमीनी स्तर के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। ओ’ब्रायन ने इसे “अनौपचारिक और विधानेतर माध्यम” करार देते हुए कहा कि आयोग इस तरह कानून से बाहर जाकर कार्य नहीं कर सकता।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग मनमाने और अप्रत्याशित तरीके से काम नहीं कर सकता तथा वैधानिक प्रक्रियाओं की जगह तदर्थ तंत्रों का सहारा लेना असंवैधानिक है। ओ’ब्रायन ने यह अर्जी अपनी उस लंबित याचिका के साथ दाखिल की है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में एसआईआर के लिए जारी दिशा-निर्देशों को पहले ही चुनौती दी हुई है।
याचिका में उल्लेख किया गया है कि पश्चिम बंगाल में 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में बिना किसी पूर्व सूचना या व्यक्तिगत सुनवाई के 58,20,898 नाम हटा दिए गए। इसके बाद यह बताया गया कि लगभग 31,68,424 मतदाताओं को 2002 की मतदाता सूची से ‘मैप’ नहीं किया जा सका, जिससे पात्र और वास्तविक मतदाताओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने बिना किसी लिखित आदेश के “तार्किक विसंगतियां” नामक एक नई श्रेणी बनाकर करीब 1.36 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी करने या जारी करने का निर्णय लिया, जिसका कोई वैधानिक आधार नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कई मतदाताओं को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा, दस्तावेजों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही और नोटिसों में स्पष्टता का अभाव था।
याचिका में यह भी आरोप है कि सुनवाई के दौरान राजनीतिक दलों के बूथ-स्तरीय एजेंटों को मतदाताओं की मदद करने से रोक दिया गया, जबकि बुजुर्ग, दिव्यांग और बीमार मतदाताओं को शारीरिक रूप से उपस्थित होने के लिए मजबूर किया गया।
ओ’ब्रायन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, अनौपचारिक माध्यमों से जारी सभी निर्देशों को अवैध घोषित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी मतदाता को प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण मताधिकार से वंचित न किया जाए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि सभी दावों और सुनवाई के निपटारे के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाए।
