नयी दिल्ली, 3 जनवरी : पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री और पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह के प्रत्यक्ष नेतृत्व में बूथ स्तर से लेकर केंद्रीय वॉर रूम तक पूरी ताकत झोंक दी है।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी पिछले पांच वर्षों से पश्चिम बंगाल में जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने में जुटी है और अब चुनावों से पहले नई रणनीति के साथ अभियान को और धार दी जा रही है। पार्टी को भरोसा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान पैदा हुई उथल-पुथल और तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरती अंदरूनी खींचतान का उसे चुनावी लाभ मिलेगा।
पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज करते हुए अपनी सीटों की संख्या तीन से बढ़ाकर 77 कर ली थी और वह राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस बार पार्टी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासन को समाप्त करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 30 दिसंबर को दावा किया था कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी। उन्होंने चुनावी माहौल बनाते हुए तृणमूल कांग्रेस पर भ्रष्टाचार, कुशासन और अवैध घुसपैठ के मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला।
शाह ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा देकर राज्य की जनसांख्यिकी को “खतरनाक रूप से बदलने” का काम किया है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो वह एक मजबूत ‘राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड’ स्थापित कर पश्चिम बंगाल से घुसपैठ को पूरी तरह समाप्त करेगी।
भाजपा नेताओं के मुताबिक, पार्टी इस चुनाव में बांग्लादेशी घुसपैठ, महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक हिंसा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर मैदान में उतरेगी। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “पार्टी इस बार बंगाल में जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अमित शाह स्वयं सभी जमीनी अभियानों और रणनीतिक प्रयासों की व्यक्तिगत निगरानी कर रहे हैं।”
भाजपा का यह भी दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर दरारें गहराती जा रही हैं। हुमायूं कबीर द्वारा नई पार्टी के गठन की घोषणा के बाद सत्तारूढ़ दल पर दबाव बढ़ा है। भाजपा नेताओं का मानना है कि इससे मुस्लिम मतों का विभाजन होगा, जो तृणमूल की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए शुक्रवार को दावा किया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार आगामी चुनावों में पांच साल पहले की तुलना में कम से कम एक सीट अधिक जीतेगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 216 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 77 सीटें मिली थीं। वाम-कांग्रेस गठबंधन उस चुनाव में खाता भी नहीं खोल सका था।
