फडणवीस बिहार चुनाव में व्यस्त, महाराष्ट्र के किसानों को मझधार में छोड़ दिया : उद्धव ठाकरे

छत्रपति संभाजीनगर, 5 नवंबर : शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह राज्य के संकटग्रस्त किसानों को छोड़कर बिहार चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। ठाकरे ने कहा कि बारिश और बाढ़ से तबाह किसानों के लिए ऋण माफी पर सरकार द्वारा दी गई 30 जून, 2026 की समयसीमा ‘‘किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं’’ है।

ठाकरे ने छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठण तालुका के नांदर गांव से अपने चार दिवसीय मराठवाड़ा दौरे की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। ठाकरे ने दिनभर में पाली (बीड), पाथरुड, शिरसाव (धाराशिव) और घरी (सोलापुर) गांवों का भी दौरा किया।

पाली गांव में किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “मैं आपके साथ हूं और मुख्यमंत्री बिहार में हैं। यहां किसान बर्बादी की कगार पर हैं, लेकिन फडणवीस चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। महाराष्ट्र में जहां ‘लाडकी बहिन योजना’ का लाभ केवल एक परिवार के दो सदस्यों को दिया जाता है, वहीं बिहार में हर महिला के खाते में 10,000 रुपये दिए जा रहे हैं — क्योंकि वहां चुनाव हैं।”

उद्धव ठाकरे ने एक वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि फडणवीस खुद कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार को सबसे ज्यादा प्यार करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या महाराष्ट्र उनके लिए सौतेला बेटा है? वे यहां सत्ता का सुख भोगते हैं, लेकिन वहां ऐसी बातें करते हैं। प्रधानमंत्री को कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी राज्यों से समान प्रेम होना चाहिए।”

मुख्यमंत्री फडणवीस ने हाल ही में घोषणा की थी कि कृषि ऋण माफी पर निर्णय अगले वर्ष 30 जून तक लिया जाएगा। उनका कहना था कि पहले किसानों को बाढ़ राहत मुआवजा देने और रबी सीजन की बुवाई की तैयारी सुनिश्चित करना जरूरी है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे ने कहा, “सरकार का यह कहना कि वह ऋण माफी पर अध्ययन कर रही है, किसानों के साथ मजाक है। हमारी सरकार के दौरान यह अध्ययन पूरा हो चुका था और ऋण माफी भी दी गई थी। किसानों को अब तत्काल कर्ज माफी की जरूरत है, न कि एक साल बाद की तारीख की।”

उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों को उनके नुकसान के मुआवजे के रूप में प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये दिए जाएं और ऋण माफी पर तुरंत निर्णय लिया जाए। ठाकरे ने यह भी सवाल उठाया कि “यदि जून 2026 में ऋण माफ होना है, तो क्या किसानों को तब तक अपनी किस्तें चुकानी चाहिए? और अगर हां, तो वे यह पैसा कहां से लाएं?”

मराठवाड़ा दौरे के दौरान ठाकरे ने किसानों से एकजुट होकर मौजूदा सरकार को “सबक सिखाने” की अपील भी की और कहा कि शिवसेना (उबाठा) किसानों की आवाज बुलंद करती रहेगी।

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