पूंजीगत व्यय में कटौती कर वित्त मंत्री ने पिछले साल के वादे भुला दिए : पी. चिदंबरम

नयी दिल्ली, 9 फरवरी (Agency)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ने पिछले वर्ष संसद में किए गए अपने वादों को भुला दिया है। राज्यसभा में बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा बजट है जिसे आसानी से भुला दिया जाएगा, क्योंकि यह न तो विकास को गति देता है और न ही रोजगार व निवेश की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है।

चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने ऐसे समय में पूंजीगत व्यय में भारी कटौती की है, जब न तो सार्वजनिक क्षेत्र, न ही निजी क्षेत्र और न ही विदेशी निवेशक भारत में निवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में पूंजीगत व्यय में 1,44,376 करोड़ रुपये की कटौती की गई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

पूर्व वित्त मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले लगभग 12 वर्षों से देश में सकल स्थिर पूंजी निर्माण जीडीपी के 30 प्रतिशत पर ही अटका हुआ है। उन्होंने बताया कि 2024-25 में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) घटकर जीडीपी के 0.09 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। इसके बावजूद निजी निवेश जीडीपी के करीब 22 प्रतिशत पर ही ठहरा हुआ है, जबकि कंपनियों के पास पर्याप्त नकदी मौजूद है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने पूंजीगत व्यय में 25,335 करोड़ रुपये की कटौती की है, लेकिन इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि राज्यों के पूंजीगत व्यय, जिसके लिए केंद्र अग्रिम देता है, उसमें 1,19,041 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। चिदंबरम के अनुसार इससे राज्यों में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

कृषि और ग्रामीण विकास के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि इन क्षेत्रों के लिए आवंटन में कटौती कर गांवों को सड़कों और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण भारत की वास्तविक समस्याओं से मुंह मोड़ रही है।

बेरोजगारी गंभीर चुनौती
बेरोजगारी के मुद्दे पर चिदंबरम ने कहा कि युवा बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। कार्यबल के 25 प्रतिशत से भी कम लोग नियमित रोजगार में हैं। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार की ओर मजबूरी में रुझान बढ़ रहा है और पिछले चार-पांच वर्षों की तुलना में कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की संख्या फिर से बढ़ी है, जो आर्थिक कमजोरी का संकेत है।

उन्होंने यह भी कहा कि 144 करोड़ की आबादी वाले देश में केवल करीब 1.95 करोड़ लोग कारखानों में कार्यरत हैं, जबकि विनिर्माण क्षेत्र कई वर्षों से 16 प्रतिशत पर ही अटका हुआ है। इससे स्पष्ट है कि औद्योगिक विकास अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है।

इंटर्नशिप योजना पर सवाल
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना पर सवाल उठाते हुए चिदंबरम ने कहा कि इस योजना के तहत 1,65,000 प्रस्ताव आए, लेकिन केवल 33,000 को स्वीकार किया गया, और उनमें से भी 6,000 इंटर्न बीच में ही नौकरी छोड़कर चले गए। उन्होंने सवाल किया कि जब बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप के अवसर हैं, तो युवा उन्हें स्वीकार क्यों नहीं कर रहे। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से स्पष्टीकरण मांगा कि यह योजना इस वर्ष “पूरी तरह विफल” क्यों रही।

चिदंबरम ने बजट भाषण में उल्लिखित सरकार की “सुधार एक्सप्रेस” पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि वह पटरी से उतरी नहीं है, बल्कि बीच रास्ते में अटकी हुई है। उन्होंने कहा कि धीमी विकास दर, निवेश में गिरावट और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए इस बजट में कोई ठोस रोडमैप नहीं दिखता।

अंत में उन्होंने दोहराया कि यह बजट एक ऐसा दस्तावेज है, जिसे लोग जल्द भुला देंगे, क्योंकि यह उन वादों को पूरा करने में विफल रहा है, जो वित्त मंत्री ने पिछले वर्ष इसी सदन में किए थे।

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