पिछले एक साल में 18,000 रोजगार मेलों से 2.22 करोड़ लोगों को मिला रोजगार: सरकार

नयी दिल्ली, 29 जनवरी : केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान देशभर में आयोजित 18,000 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से कुल 2.22 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। सरकार ने यह भी दावा किया कि देश में रोजगार सृजन की गति बढ़ी है और बेरोजगारी दर घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है।

श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी दी। पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल को मजबूत किया है, जिससे नौकरी तलाशने वाले युवाओं और नियोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है।

मंत्री ने कहा, “पिछले एक वर्ष में देशभर में 18,000 रोजगार मेले आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 2.22 करोड़ लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।” उन्होंने बताया कि बीते एक दशक में एनसीएस पोर्टल को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया गया है और वर्तमान में इससे करीब 55 लाख कंपनियां जुड़ी हुई हैं। इसके साथ ही सभी राज्य सरकारों के रोजगार पोर्टलों को भी एनसीएस से जोड़ा गया है।

मांडविया ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में छह करोड़ से अधिक युवाओं ने रोजगार की तलाश में एनसीएस पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा कि रोजगार को एकल-खिड़की प्रणाली के तहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एनसीएस पोर्टल को ई-माइग्रेट पोर्टल, युवा भारत और विभिन्न कौशल विकास मंचों से भी जोड़ा गया है।

राज्यवार आंकड़ों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि बिहार में एनसीएस पोर्टल पर 53 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 39.8 लाख लोगों को चुनकर उनके लिए रोजगार के अवसर सृजित किए गए। उन्होंने बताया कि बिहार में आयोजित रोजगार मेलों में कुल 4.5 लाख युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 90,000 का चयन किया गया और केंद्र व राज्य स्तर की कंपनियों ने लगभग 43,000 लोगों को रोजगार प्रदान किया।

अपने लिखित उत्तर में मंत्री ने कहा कि रोजगार मेला युवाओं के लिए रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सरकार की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत नियमित रूप से रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि स्थानीय नियोक्ताओं और रोजगार चाहने वालों के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके।

मंत्री के अनुसार, 20 जनवरी 2026 तक बिहार में एनसीएस परियोजना के अंतर्गत 3,280 रोजगार मेले आयोजित किए गए, जिनमें 8,492 नियोक्ताओं ने भाग लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एनसीएस पोर्टल पर अंतिम नियुक्ति से संबंधित आंकड़े साझा करना अनिवार्य नहीं है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मांडविया ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में लगभग 17 करोड़ रोजगार उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने बताया कि 2004-14 के दौरान जहां रोजगार के अवसर 44.23 करोड़ से बढ़कर 47.15 करोड़ हुए थे, वहीं 2024 के आंकड़ों के अनुसार देश में रोजगार के कुल अवसर बढ़कर 64.33 करोड़ तक पहुंच गए हैं।

मंत्री ने दावा किया कि भारत में वर्तमान बेरोजगारी दर 3.2 प्रतिशत है, जो कई विकसित देशों की तुलना में कम है।

‘गिग वर्कर्स’ से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह रोजगार का एक उभरता हुआ स्वरूप है और अनुमान के अनुसार देश में लगभग दो करोड़ गिग श्रमिक कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिता (लेबर कोड) के लागू होने से इन श्रमिकों की सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
गिग श्रमिक ऐसे कामगार होते हैं, जिनका रोजगार अस्थायी या परियोजना-आधारित होता है।

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