नई दिल्ली, आठ जनवरी । भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने निशानेबाजी कोचिंग स्टाफ के वरिष्ठ सदस्य अंकुश भारद्वाज को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई तब की गई है जब एक नाबालिग निशानेबाज ने उन्हें पिछले महीने राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।
एनआरएआई ने पुष्टि की कि फरीदाबाद में भारद्वाज के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है। एफआईआर में पॉस्को अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) और भारतीय दंड संहिता की धारा 351(2) (धमकी देने से संबंधित) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एनआरएआई के सचिव राजीव भाटिया ने पीटीआई को बताया, “भारद्वाज को नैतिक आधार पर निलंबित किया गया है। जांच पूरी होने तक वह किसी भी कोचिंग गतिविधि से अलग रहेंगे। उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जाएगा।”
एफआईआर में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि कोच ने उसे राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान सूरजकुंड के होटल में अपने कमरे में बुलाया और जबरन यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने कहा कि कोच ने उसे धमकी दी कि अगर उसने किसी को इस घटना के बारे में बताया तो उसका पेशेवर करियर बर्बाद कर देंगे।
एनआरएआई ने बताया कि भारद्वाज 2024 पेरिस ओलंपिक के बाद 37 सदस्यीय कोचिंग टीम में शामिल थे और उनकी नियुक्ति भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा की गई थी।
खेल मंत्रालय ने भी मामले का संज्ञान लिया है और सभी संबंधित संस्थाओं से कहा है कि युवा खिलाड़ी को किसी प्रकार की असुरक्षा या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।
पूर्व निशानेबाज भारद्वाज को अपने करियर में 2010 में बीटा-ब्लॉकर के इस्तेमाल के लिए डोपिंग प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था। बीटा-ब्लॉकर हृदय गति, मांसपेशियों में कंपन और चिंता कम करने में मदद करता है और निशानेबाजी, तीरंदाजी और बिलियर्ड्स में प्रतिबंधित है।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और आवश्यक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
