नयी दिल्ली, 29 जनवरी। 2020 के दिल्ली दंगों के कथित बड़े षड्यंत्र मामले में राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, अतहर खान और सलीम मलिक की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि तीनों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है और इस स्तर पर उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने बृहस्पतिवार को यह आदेश पारित करते हुए कहा कि भले ही उच्चतम न्यायालय ने इसी मामले में पांच आरोपियों को इस महीने की शुरुआत में जमानत दी हो, लेकिन सह-आरोपियों को मिली राहत के आधार पर स्वतः समानता का दावा नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बार यह निष्कर्ष निकल चुका है कि आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं, तो पहले के आदेश की समीक्षा कर भिन्न राय बनाना संभव नहीं है।
तीनों आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने पांच जनवरी को उच्चतम न्यायालय द्वारा कुछ सह-आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद समानता के आधार पर जमानत मांगी थी। हालांकि अदालत ने यूएपीए की धारा 43डी(5) का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं, तो जमानत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि ताहिर हुसैन के घर से कथित तौर पर पेट्रोल बम (मोलोटोव कॉकटेल) बनाने में प्रयुक्त सामग्री, ईंटें, पत्थर और गुलेल बरामद होने का आरोप है। वहीं अतहर खान पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप हैं। सलीम मलिक पर भी सीएए/एनआरसी विरोधी बैठकों के आयोजन में भूमिका का आरोप लगाया गया है।
उल्लेखनीय है कि पांच जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली दंगों की साजिश मामले में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी थी, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को यह कहते हुए राहत नहीं दी गई थी कि सभी आरोपी समान स्थिति में नहीं हैं।
इस मामले में नामजद 20 आरोपियों में से दो अब भी फरार हैं, जबकि शेष में से सात आरोपी अभी जेल में बंद हैं।
