नयी दिल्ली, 3 नवंबर । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का परिसर रविवार देर शाम पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा नजर आया। छात्रसंघ चुनावों से पहले आयोजित अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के बीच वाद-विवाद (डिबेट) कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र शामिल हुए और सभागार राजनीतिक नारों से गूंज उठा।
वाद-विवाद के मंच पर छह उम्मीदवार मौजूद थे — वाम गठबंधन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), एनएसयूआई, प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (पीएसए), दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (डीएसओ) और एक स्वतंत्र उम्मीदवार। हर उम्मीदवार ने जेएनयू को “असली आवाज़” देने का दावा किया।
वाम गठबंधन की अदिति मिश्रा, जो अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विद्यालय की पीएचडी शोधार्थी हैं, ने अपने भाषण में कहा, “हम फलस्तीन के लिए, कश्मीर के राज्य के दर्जे के लिए और लद्दाख के पर्यावरण के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे।” उन्होंने केंद्र सरकार पर “भारत की अवधारणा पर हमला करने” और “असहमति की जगह खत्म करने” का आरोप लगाया।
उनके प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी के विकास पटेल ने कहा कि “विश्वविद्यालय वामपंथी राजनीति से थक चुका है। 50 सालों से वही लोग सत्ता में हैं और विश्वविद्यालय को बरबाद कर रहे हैं।” उन्होंने वामदलों पर “समानता के नाम पर पाखंड” करने का आरोप लगाया और कहा कि “छात्रों के लिए साल भर काम एबीवीपी ही करती है।”
एनएसयूआई के विकास ने दोनों धड़ों को निशाने पर लिया और कहा कि “वामपंथ और दक्षिणपंथ दोनों ने जेएनयू के असली मुद्दे — छात्रवृत्ति, शोध निधि और सुरक्षा — को दरकिनार कर दिया है।”
सबसे जोशीला भाषण पीएसए की शिंदे विजयलक्ष्मी व्यंकट राव का रहा। उन्होंने मंच पर ‘चीफ प्रॉक्टर ऑफिस’ की नियम पुस्तिका फाड़ दी और कहा, “यह सुरक्षा नहीं, निगरानी का प्रतीक है।” उन्होंने आरएसएस की गतिविधियों पर सवाल उठाए और कहा, “हमारे लिए विरोध की जगह नहीं, लेकिन परेड के लिए जगह है।” उनका बशीर बद्र का शेर — “लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में” — सभागार में तालियों से गूंज उठा।
स्वतंत्र उम्मीदवार अंगद सिंह ने कहा, “मैं गाजा या नेपाल की चिंता तब करूंगा जब छात्रों के गिरते हॉस्टल की छतों की मरम्मत हो जाएगी।”
वहीं डीएसओ की शिरषवा इंदु ने शिक्षा और पर्यावरणीय संकटों पर ध्यान दिलाया और कहा कि “चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम ने छात्रों पर शैक्षणिक दबाव बढ़ा दिया है।”
इस बार वाम संगठन — आइसा, एसएफआई और डीएसएफ — लंबे अंतराल के बाद गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। मतदान 4 नवंबर को होगा और परिणाम 6 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
पिछले वर्ष आइसा के नीतीश कुमार अध्यक्ष बने थे, जबकि एबीवीपी के वैभव मीणा ने संयुक्त सचिव पद जीता था। इस बार मुकाबला और भी कांटे का माना जा रहा है।
