जम्मू कश्मीर में फिर शुरू हुई 153 साल पुरानी परंपरा, सीएम उमर अब्दुल्ला ने पूरा किया वादा

जम्मू, 16 अक्टूबर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य की ऐतिहासिक ‘दरबार स्थानांतरण’ परंपरा को फिर से बहाल करने का आदेश देकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। उन्होंने गुरुवार को घोषणा की कि उनकी सरकार ने इस पारंपरिक व्यवस्था को पुनः लागू करने का निर्णय लिया है, जो डोगरा शासनकाल से चला आ रहा था और 2021 में इसे समाप्त कर दिया गया था।

मुख्यमंत्री ने जम्मू में अपनी सरकार के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “आज मैंने इस फैसले से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और मुझे उम्मीद है कि जल्द ही इसका आधिकारिक आदेश जारी हो जाएगा। हमने जो वादा जनता से किया था, उसे पूरा किया है।”

उन्होंने बताया कि यह निर्णय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित है और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा फाइल पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद इसे क्रियान्वित किया जा रहा है।

क्या है ‘दरबार स्थानांतरण’ परंपरा?

‘दरबार स्थानांतरण’ की शुरुआत 1872 में महाराजा रणबीर सिंह द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य जम्मू और श्रीनगर के बीच बदलते मौसम के अनुसार प्रशासन को स्थानांतरित करना था। गर्मियों में सरकारी कार्यालय श्रीनगर में और सर्दियों में जम्मू में संचालित होते थे। इस प्रक्रिया में करीब 10,000 कर्मचारियों, दस्तावेजों, कंप्यूटरों और फर्नीचर को ट्रकों से स्थानांतरित किया जाता था।

क्यों हुआ था इसे बंद?

2021 में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अगुवाई वाली केंद्रशासित प्रशासन ने इस परंपरा को समाप्त कर दिया था। उस समय यह तर्क दिया गया था कि इस व्यवस्था पर सालाना करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिसे सार्वजनिक सेवाओं में बेहतर ढंग से लगाया जा सकता है। साथ ही, सरकारी रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से इस स्थानांतरण की जरूरत नहीं रह गई थी।

उमर का भाजपा पर हमला

उमर अब्दुल्ला ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “जो लोग हमें जम्मू-कश्मीर के इतिहास को न समझने का आरोप लगाते हैं, उन्होंने खुद ही इस क्षेत्र की ऐतिहासिक परंपराओं को खत्म किया। भाजपा ने डोगरा विरासत को जितना नुकसान पहुंचाया है, उतना किसी और ने नहीं।”

भाजपा की प्रतिक्रिया

इस फैसले को लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि उमर अब्दुल्ला सरकार का एक साल “नाकामी की मिसाल” रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने वादों – जैसे 12 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, 10 किलो राशन प्रति माह, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और एक लाख नौकरियां – में से एक भी पूरा नहीं किया।

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