जम्मू-कश्मीर: आतंकवाद से संबंध के संदेह में पांच और सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

जम्मू-कश्मीर: आतंकवाद से संबंध के संदेह में पांच और सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

श्रीनगर, 13 जनवरी । जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद से संबंध होने के संदेह में मंगलवार को पांच और सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2020 से अब तक आतंकवादी संगठनों से जुड़े पाए जाने पर कुल 85 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कदम “सरकारी तंत्र के भीतर मौजूद आतंकवादी नेटवर्क और उसके बुनियादी ढांचे की जड़ों को समाप्त करने” के उद्देश्य से उठाया गया है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षक मोहम्मद इशफाक, प्रयोगशाला तकनीशियन तारिक अहमद राह, पीएचई विभाग के सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर, वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट और स्वास्थ्य विभाग के चालक मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, इन सभी को संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत सेवा से हटाया गया है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि राज्य की सुरक्षा के हित में औपचारिक जांच कराना उचित न हो, तो किसी सरकारी कर्मचारी को बिना जांच के बर्खास्त किया जा सकता है।

अधिकारियों द्वारा तैयार दस्तावेजों के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग में ‘रहबर-ए-तालीम’ के रूप में नियुक्त और वर्ष 2013 में नियमित किए गए शिक्षक मोहम्मद इशफाक कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के लिए काम कर रहा था। वह एलईटी के कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के संपर्क में था और उसे 2022 की शुरुआत में डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी के बाद अप्रैल 2022 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

प्रयोगशाला तकनीशियन तारिक अहमद राह के बारे में अधिकारियों ने बताया कि वह कम उम्र से ही आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रभाव में आ गया था। वर्ष 2005 में हिज्बुल आतंकवादी अमीन बाबा के पाकिस्तान भागने की जांच के दौरान उसके आतंकवाद से संबंध उजागर हुए। आरोप है कि राह ने आतंकवादी को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराने में मदद की, जिसके बाद अमीन बाबा पाकिस्तान पहुंच गया और वहीं से भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।

पीएचई विभाग के सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर को 1996 में नियमित किया गया था, लेकिन वह बांदीपुरा जिले के गुरेज क्षेत्र में एलईटी का सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) बन गया था और लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों में सहायता कर रहा था।

वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट पर भी हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ सक्रिय रूप से काम करने का आरोप है। अधिकारियों के अनुसार, वह अनौपचारिक रूप से एक पूर्व विधायक का निजी सहायक भी था, जिनके हिज्बुल से संबंध बताए जाते हैं।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में चालक के रूप में कार्यरत मोहम्मद यूसुफ के बारे में बताया गया कि वह पाकिस्तान में रहने वाले हिज्बुल आतंकवादी बशीर अहमद भट के लगातार संपर्क में था। उसके निर्देश पर यूसुफ ने हथियार और गोला-बारूद की खरीद तथा गांदरबल जिले में धन पहुंचाने जैसे कार्यों में भूमिका निभाई। 20 जुलाई 2024 को पुलिस ने एक वाहन से यूसुफ और उसके सहयोगी एहसान हमीद को पकड़ा था, जिनके पास से एक पिस्तौल, गोला-बारूद, एक ग्रेनेड और पांच लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे।

अधिकारियों ने कहा कि आतंकवाद से किसी भी प्रकार के संबंध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और राज्य की सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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