जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय, भाजपा का तीखा हमला

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद

नयी दिल्ली, नौ जनवरी । कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत द्वारा आरोप तय करने के आदेश के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस फैसले के बाद लालू यादव पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विभिन्न घोटालों में संलिप्तता के चलते वह अब कानून की गिरफ्त में आ चुके हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अदालतों ने पहले ही चारा घोटाले से जुड़े अलग-अलग मामलों में लालू यादव को कुल 32.5 वर्ष की सजा सुनाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन के बदले नौकरी मामला भ्रष्टाचार की उसी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें लालू यादव बार-बार कानून के दायरे में आए हैं।

रवि शंकर प्रसाद ने कहा, “बिटुमेन घोटाला हो या जमीन के बदले नौकरी घोटाला, लालू प्रसाद यादव पर एक के बाद एक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। एक कहावत है कि कानून से कोई नहीं बच सकता और आज वही लालू यादव के साथ हो रहा है।”

इससे पहले दिन में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि तत्कालीन रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने रेलवे मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया।

अदालत के अनुसार, यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और इसके बदले जमीन हासिल की गई। न्यायाधीश ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अंतिम रिपोर्ट में एक बड़ी आपराधिक साजिश के स्पष्ट संकेत मिले हैं।

अदालत ने लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों की ओर से दायर बरी किए जाने की याचिका को ‘अनुचित’ करार देते हुए खारिज कर दिया। आदेश में यह भी कहा गया कि पूर्व रेल मंत्री और अन्य आरोपी जमीन हड़पने के उद्देश्य से एक आपराधिक गिरोह के रूप में कार्य कर रहे थे।

इस मामले में अदालत ने 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं, जबकि रेल अधिकारियों और उनके स्थान पर नियुक्त अधिकारियों सहित 52 अन्य लोगों को बरी कर दिया गया है। इस फैसले के बाद जमीन के बदले नौकरी घोटाले में कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण की राह साफ हो गई है।

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