तिरुवनंतपुरम, सात जनवरी । कांग्रेस सांसद और संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हाल में अमेरिका द्वारा पकड़े जाने की घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पुराने सिद्धांतों की जगह अब “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाला जंगल का कानून लेता दिखाई दे रहा है।
केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (केआईएलबीएफ) के चौथे संस्करण के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा कि वह पूरी तरह निजी हैसियत से इस घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय कानून के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर सदस्य देशों की संप्रभुता, सीमाओं के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान में बल प्रयोग से परहेज जैसे मूल सिद्धांतों पर आधारित है, लेकिन वेनेजुएला के मामले में इन सभी का उल्लंघन हुआ है।
थरूर ने कहा कि स्थिति सैन्य रूप से लंबी नहीं खिंची और उपराष्ट्रपति के अंतरिम राष्ट्रपति बनने के बाद वहां सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। उन्होंने सड़कों पर दमन और लोगों की गिरफ्तारी की खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे चिंता और बढ़ जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी देश के प्राकृतिक संसाधनों पर उसी देश का अधिकार होता है और उनके उपयोग का फैसला वहां के प्रतिनिधियों को करना चाहिए। दूर बैठकर वर्षों पुराने मामलों पर निर्णय सुनाना उचित नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संप्रभुता के सिद्धांत का सम्मान करना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क्यूबा और ग्रीनलैंड को लेकर कथित बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुरानी विश्व व्यवस्था अब एक नई “विश्व अव्यवस्था” में बदल रही है, जहां ताकत के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की संभावित मुलाकात के सवाल पर थरूर ने कहा कि हर देश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने भारत की बहुआयामी विदेश नीति का समर्थन करते हुए कहा कि रूस, अमेरिका, यूरोप, चीन, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत देशों के साथ संवाद बनाए रखना भारत के विकल्पों को अधिकतम करने की नीति का हिस्सा रहा है।
थरूर ने कहा कि भारत ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र चार्टर का समर्थन किया है और इसी कारण वेनेजुएला में जो हुआ, वह दलगत राजनीति से परे कई भारतीयों को परेशान करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विदेश नीति में कई बार सरकार जो नहीं कहती, वह भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना वह कहती है।
