चुनावी राज्यों केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के नेताओं ने बजट की आलोचना की

नयी दिल्ली, एक फरवरी –  इस साल विधानसभा चुनाव का सामना करने वाले राज्यों केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के सत्तारूढ़ दलों के नेताओं ने रविवार को पेश केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें उनके राज्यों को ”नजरअंदाज” किया गया है। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बजट का स्वागत किया।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हालांकि अपने बजट भाषण में चुनाव वाले राज्यों के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की, लेकिन चेन्नई के लिए हाई-स्पीड रेल लिंक, पश्चिमी घाट में पोधिगई मलाई में एक पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ पर्वतीय मार्ग और दक्षिणी राज्यों में दुर्लभ खनिजों के गलियारे के प्रस्ताव थे।
सीतारमण ने घोषणा की कि असम में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (एनआईएमएनएचएस) की स्थापना की जाएगी। उन्होंने पश्चिम बंगाल के दानकुनी को गुजरात के सूरत से जोड़ने वाले एक नए समर्पित माल ढुलाई गलियारे, दुर्गापुर को एक प्रमुख केंद्र बनाकर एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे और केंद्र की पूर्वोदय परिकल्पना के तहत पर्यटन केंद्रित परियोजनाओं का भी प्रस्ताव रखा।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बजट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह ”दिशाहीन, जनविरोधी है और इसमें दूरदर्शिता का अभाव है” तथा बजट में आम लोगों एवं उनके राज्य के लिए कुछ भी नहीं है।, वहीं तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं पर पश्चिम बंगाल के लोगों को ”बांग्लादेशी” करार देने का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया, ”यह बजट दिशाहीन है, इसमें दूरदर्शिता का अभाव है तथा यह नीरस एवं जनविरोधी है। यह बजट महिला-विरोधी, किसान-विरोधी, शिक्षा-विरोधी है तथा यह अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के भी खिलाफ है…। बजट में पश्चिम बंगाल के लिए कुछ भी नहीं है।”
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो बनर्जी ने आरोप लगाया, ”पश्चिम बंगाल के लिए उन्होंने (बजट में) क्या दिया है? कुछ नहीं। वे बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन करते कुछ नहीं।”
बुनियादी ढांचे से संबंधित प्रस्तावों का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा कि केंद्र ने पहले से घोषित परियोजनाओं को ”सिर्फ दोहराया” है।
उन्होंने दावा किया, ”माल ढुलाई गलियारे का जिक्र मैंने 2009 के अपने रेलवे बजट में किया था। मैंने दानकुनी और अमृतसर का जिक्र किया था। पिछले 15 वर्षों से इस पर कोई खर्च नहीं किया गया है।”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, ”हम पहले ही छह आर्थिक गलियारों की घोषणा कर चुके थे। उन्होंने तीन गलियारों के बारे में जो कहा वह झूठ है।”
ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल के लोगों को ”बांग्लादेशी” के रूप में देखने का आरोप लगाया और बजट भाषण में राज्य का उल्लेख न करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा, ”बजट भाषण 85 मिनट लंबा था- 5,100 सेकंड का… बंगाल का जÞक्रि तक नहीं हुआ। बंगाल की बात छोड़िए; किसान, युवा…किसी के लिए भी कुछ ठोस नहीं था।”
अभिषेक ने कहा, ”यह केंद्र सरकार और उसके मंत्री हैं, जिन्होंने बजट पेश किया, वही हमें बांग्लादेशी कहते हैं। बजट में बंगाल का तो जÞक्रि तक नहीं किया गया। जल जीवन मिशन का पैसा रोक दिया गया है, उन्होंने पुराने वादे भी पूरे नहीं किए हैं।”
केरल में, सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) दोनों ने बजट की कड़ी आलोचना की।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बजट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे राज्य के प्रति केंद्र सरकार की लगातार जारी भेदभावपूर्ण नीतियां और उपेक्षापूर्ण रवैया उजागर हुआ है।
विजयन ने यहां एक बयान में कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानबूझकर इस तथ्य की अनदेखी की कि केरल भी भारत का हिस्सा है।
संसद में सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की लंबे समय से जारी मांगों जैसे- एम्स की स्थापना, रेलवे विकास के लिए सात हाई स्पीड कॉरिडोर और विड़िण्गम बंदरगाह के लिए विशेष पैकेज-को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
मुख्यमंत्री ने वित्त आयोग के लिए आवंटन को लेकर भी निराशा व्यक्त की और कहा कि केरल के हिस्से को बढ़ाने की मांग को अस्वीकार करना संघीय सिद्धांतों को कमजोर करता है।
केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक वी डी सतीशन ने शनिवार को केंद्रीय बजट में घोषित दुर्लभ खनिज गलियारे पर संशय जताते हुए आरोप लगाया कि यह राज्य के संसाधनों को कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपने का प्रयास हो सकता है।
उन्होंने कहा, ”इसे कॉरपोरेट कंपनियों के लिए केरल के दुर्लभ खनिज संसाधनों को चुराने का अवसर नहीं बनाया जाना चाहिए। मैं इस परियोजना को संदेह की नजर से देखता हूं।”
तमिलनाडु की ‘अनदेखी करने’ को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट राज्य के लिए बेहद निराशाजनक है।
उन्होंने कहा कि बजट में तमिलनाडु के हितों की पूरी तरह से उपेक्षा कर दी गयी है तथा गरीबों, महिलाओं, किसानों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए कुछ भी नहीं है।
उन्होंने यहां एक बयान में कहा, ”तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की दहलीज पर है, ऐसे में हमें उम्मीद थी कि कम से कम इस साल तो राज्य केंद्र की भाजपा सरकार की नजरों में आएगा और हमारी आवाज उस तक पहुंचेगी। हालांकि, इस साल भी भाजपा सरकार ने सिर्फ निराशा ही दी है।”
तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी एवं भाजपा की सहयोगी अन्नाद्रमुक के महासचिव ई. के. पलानीस्वामी ने रविवार को केंद्रीय बजट के प्रस्तावों की सराहना की और कहा कि इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और तमिलनाडु को कई योजनाओं से फायदा होगा।
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पलानीस्वामी ने कुछ विशिष्ट पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे तमिलनाडु के वस्त्र उद्योग केंद्रों जैसे तिरुप्पुर और करूर को लाभ मिलेगा और चेन्नई से जुड़ीं हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी योजनाओं से बड़े बदलाव होंगे।
अन्नाद्रमुक के शीर्ष नेता ने कहा कि 10,000 करोड़ रुपये की एसएमई विकास निधि और सूक्ष्म उद्योगों की मदद के लिए 2,000 करोड़ रुपये का टॉप-अप आत्मनिर्भर भारत कोष तमिलनाडु को लाभान्वित करेगा।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बजट को ‘सुधारोन्मुखी’ बजट करार देते हुए उसकी सराहना की और कहा कि इससे राज्य सहित देश के समूचे पूर्वी क्षेत्र को सार्थक रूप से लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि बजट में भारत की वैश्विक आकांक्षाओं और जमीनी स्तर के विकास के बीच एक अच्छा संतुलन बनाए रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने इस बात का भी उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2027 के बजट में पूर्वोत्तर के विकास के लिए 6,812 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो इस क्षेत्र पर मोदी सरकार के निरंतर ध्यान को रेखांकित करता है।
उन्होंने कहा कि बजट में राजकोषीय अनुशासन और मूल्य स्थिरता पर लगातार बल देना भी उतना ही सराहनीय है।
पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और असम के साथ-साथ पुडुचेरी में भी कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं, क्योंकि इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई-जून में समाप्त हो रहा है।

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