गणतंत्र दिवस: विभिन्न राज्यों में नेताओं ने संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने का किया आह्वान

गणतंत्र दिवस

नयी दिल्ली, 26 जनवरी । देशभर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित परेडों और समारोहों के दौरान राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया तथा संविधान के मूल्यों को कायम रखने का आह्वान किया। कई राज्यों में सरकारों की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया, वहीं कुछ नेताओं ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप भी लगाए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए नागरिकों से संविधान के आदर्शों से प्रेरित होकर ‘सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से नए उत्तर प्रदेश के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तिरंगा फहराने के बाद केंद्र सरकार पर राज्य के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने मनरेगा और लंबित ग्रामीण विकास निधि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अधिकतम बलिदान देने के बावजूद पंजाब के साथ अन्याय हुआ है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गणतंत्र दिवस संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक समानता और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में नए युग की शुरुआत हो चुकी है और आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। मौलाना आजाद स्टेडियम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मुख्य अतिथि रहे।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने ‘एकरूप भारत’ के बजाय ‘एकजुट भारत’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि देश की ताकत उसकी विविधता में है। उन्होंने कहा कि संस्कृतियों और भाषाओं का सह-अस्तित्व ही भारत की पहचान है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर खतरे की चेतावनी देते हुए कहा कि संविधान का विरोध करने वाले सामाजिक न्याय और परिवर्तन के भी विरोधी हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने धर्मनिरपेक्षता और संघवाद की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रेड रोड पर भव्य परेड आयोजित की गई, जिसमें राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने सलामी ली। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों के प्रति नई प्रतिबद्धता जताई।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आगामी चुनावों का उल्लेख करते हुए विकास बनाम ‘वोट बैंक की राजनीति’ का मुद्दा उठाया। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 2030 तक एक करोड़ सरकारी और अन्य रोजगार सृजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माओवादी हिंसा को लोकतंत्र के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इसे जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य अब पूरा होने जा रहा है। महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राज्य को विदेशी निवेश का अग्रणी केंद्र बताया, जबकि मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और झारखंड के नेताओं ने भी विकास, कृषि, रोजगार और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर जोर दिया।

कुल मिलाकर, देशभर में गणतंत्र दिवस समारोहों के दौरान संविधान, लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

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