बेंगलुरु, 28 जनवरी — कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को उस समय भारी हंगामा हुआ, जब विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सरकार पर राज्यपाल आवास ‘लोकभवन’ के फोन टैप कराने का गंभीर आरोप लगाया। भाजपा ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली सरकार को ‘फोन टैपिंग सरकार’ करार देते हुए सवाल उठाया कि राज्य के मंत्री लोकभवन और राज्यपाल को आने वाली कॉल की जानकारी कैसे प्राप्त कर रहे हैं।
यह मुद्दा राज्य विधानमंडल की संयुक्त बैठक में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान उठा। भाजपा विधायक सुरेश कुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत के कथित अपमान और उन पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर कांग्रेस सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अतीत में भी राज्यपालों ने संयुक्त सत्र में पूरा संबोधन पढ़े बिना उसे सदन के पटल पर रख दिया है और इसके उदाहरण मौजूद हैं।
इस पर कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा राज्यपाल को दिल्ली से फोन पर निर्देश मिल रहे थे, जिसके चलते उन्होंने पूरा भाषण नहीं पढ़ा। पाटिल ने कहा, “दिल्ली से आए फोन के बाद राज्यपाल ने पूरा भाषण नहीं पढ़ा, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए।”
पाटिल के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सुरेश कुमार ने कहा कि कानून मंत्री बेहद गंभीर आरोप लगा रहे हैं और सवाल किया कि क्या सरकार राज्यपाल को दिल्ली से आने वाली कॉल की जानकारी हासिल करने के लिए लोकभवन के फोन टैप कर रही है। भाजपा के कई विधायकों ने इस सवाल का समर्थन करते हुए सदन में नारेबाजी की, जिससे कार्यवाही बाधित हुई।
गौरतलब है कि 22 जनवरी को एक नाटकीय घटनाक्रम में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने विधानमंडल के संयुक्त सत्र में राज्य सरकार द्वारा तैयार संबोधन पढ़ने से इनकार कर दिया था और अपना पारंपरिक भाषण मात्र तीन पंक्तियों में समाप्त कर दिया था। इस पर कांग्रेस सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। बुधवार को उसी पृष्ठभूमि में फोन टैपिंग के आरोपों ने विधानसभा की कार्यवाही को और गरमा दिया।
