ओडिशा सरकार ने पुरी भगदड़ मामले में सात पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया

भुवनेश्वर, 8 नवंबर : ओडिशा सरकार ने पुरी में हुई भगदड़ की घटना में लापरवाही बरतने के लिए सात पुलिस अधिकारियों और एक निजी तकनीकी कंपनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है। इस हादसे में दो महिलाओं समेत तीन लोगों की मौत हुई थी और 20 अन्य लोग घायल हुए थे।

घटना 29 जून की सुबह करीब 4 बजे हुई, जब पुरी में रथ यात्रा के दौरान श्री गुंडिचा मंदिर के पास दो ट्रक अनुष्ठान के लिए लकड़ियां लेकर भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में प्रवेश कर गए। भीड़ के बीच भगदड़ मच गई, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ।

गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव ने हाल ही में डीजीपी को लिखे पत्र में कहा कि इस मामले में विकास आयुक्त सह अतिरिक्त मुख्य सचिव अनु गर्ग द्वारा की गई जांच की सिफारिश के अनुसार कार्रवाई की जाए। गर्ग ने 31 जुलाई को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सौंप दी थी।

जांच में सामने आया कि सात पुलिस अधिकारियों—अजय कुमार पाधी (कमांडेंट, ओएसएपी तीसरी बटालियन, कोरापुट), विष्णु प्रसाद पाती (डीसीपी, भुवनेश्वर-कटक), तापस रंजन दास (कमांडेंट, एसएसएमएसवी, पुरी), के.के. नायक (डिप्टी कमांडेंट, एसएसएमएसवी, पुरी), प्रशांत कुमार साहू (डीएसपी सिटी, पुरी), सुशांत कुमार साहू (आईआईसी, कुंभरापाडा थाना) और सारदा प्रसाद दाश (कमांडेंट, ओएसएपी आठवीं बटालियन, छत्रपुर)—ने अपनी जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही दिखाई।

विशेषकर भीड़ प्रबंधन के प्रभारी वरिष्ठतम अधिकारी पाधी और पाती घटना के समय मौके पर अनुपस्थित पाए गए। जांच रिपोर्ट ने उनकी कर्तव्यहीनता की पुष्टि की और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। गृह विभाग ने डीजीपी को लिखा कि निलंबन के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए।

रिपोर्ट में पुरी स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) में स्थापित एआई-आधारित निगरानी प्रणाली की भी गंभीर खामियां उजागर हुईं। स्वीकृत 275 कैमरों में से केवल 123 सक्रिय थे, जिससे कई प्रमुख क्षेत्रों पर निगरानी नहीं हो पा रही थी। जांच ने ICCC विक्रेता को काली सूची में डालने और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की।

भगदड़ के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तत्कालीन पुरी जिला कलेक्टर सिद्धार्थ शंकर स्वैन और पुलिस अधीक्षक वी. अग्रवाल का तबादला कर दिया था। सरकार ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भीड़ नियंत्रण और तकनीकी निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।

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