लखनऊ, 18 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बुधवार को बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के अंतर्गत राज्य के 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नोटिस न मिलने की वजह से किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन में रिणवा ने एसआईआर की प्रगति का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में “नो मैपिंग” या अन्य तार्किक विसंगतियां पाई गईं, उन्हें नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल ऐसे 1.04 करोड़ मतदाताओं ने पिछली पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान आवश्यक कॉलम खाली छोड़े थे, जबकि 2.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में तकनीकी या तार्किक गड़बड़ियां सामने आईं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार अब तक 1.85 करोड़ नोटिस वितरित किए जा चुके हैं और 1.15 करोड़ मामलों में सुनवाई पूरी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि पांच फरवरी तक केवल 30 लाख सुनवाई हुई थीं, जबकि 18 फरवरी तक यह संख्या बढ़कर 1.15 करोड़ पहुंच गई। पिछले तीन दिनों में ही लगभग 37 लाख मामलों की सुनवाई पूरी की गई है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी मामलों का निस्तारण 27 मार्च की निर्धारित समयसीमा के भीतर कर लिया जाएगा।
रिणवा ने कहा कि यदि किसी मतदाता तक नोटिस नहीं पहुंचा है तो उसके पास पर्याप्त समय है और उसे प्रक्रिया के दौरान अवसर दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि नोटिस की अनुपलब्धता किसी भी स्थिति में नाम हटाने का आधार नहीं बनेगी।
सुनवाई प्रक्रिया को गति देने के लिए अधिकारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में 403 विधानसभा क्षेत्रों में 4,003 चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) तैनात थे, जबकि अब ईआरओ और सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) सहित कुल 13,161 अधिकारी सुनवाई में लगे हैं।
नाम जोड़ने से संबंधित फॉर्म-6 के बारे में उन्होंने बताया कि छह जनवरी से 17 फरवरी के बीच 54.4 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 27,20,320 महिलाएं शामिल हैं, जो पुरुषों से अधिक हैं। वहीं नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के अंतर्गत छह जनवरी से 17 फरवरी तक 1,40,425 आवेदन मिले। 16 फरवरी तक प्राप्त 1,35,412 आवेदनों में से 70,865 स्वयं नाम हटाने के अनुरोध, 18,863 स्वत: हटाने (ऑटो-डिलीशन) के मामले और 47,684 अन्य व्यक्तियों द्वारा दिए गए आवेदन शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक कुल 23,935 नाम हटाए गए हैं, जिनमें 14,388 ऑटो-डिलीशन, 5,211 स्वयं के अनुरोध और 4,336 अन्य व्यक्तियों के अनुरोध पर हटाए गए। ऑटो-डिलीशन उन मामलों में होता है जब मतदाता स्थान परिवर्तन कर नए क्षेत्र में पंजीकृत हो जाता है या मृत्यु जैसे कारण सामने आते हैं।
रिणवा ने यह भी कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों में प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का समाधान किया जा रहा है और अनुपालन को आसान बनाने के लिए प्रक्रिया को सरल किया गया है। उन्होंने नाम हटाने से जुड़े आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए ही यह अभियान चलाया जा रहा है।
