उप्र विधानसभा सहित देश के सभी चुनाव अकेले लड़ेगी बसपा, 2027 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएंगे: मायावती

लखनऊ, 15 जनवरी : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव–2027 सहित देश में होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले ही लड़ेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के साथ किसी भी स्तर पर गठबंधन नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में बसपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी।

लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मायावती ने भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी ने यह निर्णय लिया है कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में सभी चुनाव अकेले लड़ना ही अधिक उचित है। किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन का कोई सवाल नहीं है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में तभी गठबंधन पर विचार किया जा सकता है, जब यह भरोसा हो जाए कि किसी सहयोगी दल, विशेषकर अगड़ी जातियों के वोट बसपा को स्थानांतरित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति बनने में वर्षों लग सकते हैं।

बसपा सुप्रीमो ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता बसपा के चार कार्यकालों को याद कर रही है और 2027 में एक बार फिर पार्टी को सत्ता में लाने का मन बना चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता पूरी मजबूती के साथ मैदान में जुट चुके हैं, ताकि इस बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई जा सके।

मायावती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, भाजपा और अन्य जातिवादी दल बसपा को कमजोर करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सबका मुंहतोड़ जवाब देकर उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाई जाएगी।

ईवीएम को लेकर उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि पिछले कई चुनावों की तरह इस बार भी धांधली की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद बसपा पूरे देश में मजबूती से चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि देशभर में ईवीएम के विरोध की आवाजें बढ़ रही हैं और एक दिन यह प्रणाली विफल होगी, तब सही चुनाव परिणाम सामने आएंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बसपा सरकार के दौरान प्रदेश में दंगे नहीं हुए और सभी वर्गों, जिनमें दलित, पिछड़े, मुस्लिम और यादव समाज शामिल हैं, का पूरा ध्यान रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांशीराम के निधन पर राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया गया और दलित महापुरुषों की उपेक्षा की गई।

मायावती ने कहा कि मौजूदा सरकारें बसपा सरकार द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं का केवल नाम बदलकर संचालन कर रही हैं, लेकिन आम जनता को उनका वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवादी दल बसपा के आंदोलन को रोकने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपना रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने दलित महापुरुषों को सम्मान दिया, उनकी प्रतिमाएं लगवाईं, पार्क बनवाए और योजनाएं शुरू कीं। आज दूसरे दल हमारी नकल कर रहे हैं। इनके मुंह में राम और बगल में छुरी है।”

बसपा संस्थापक कांशीराम को याद करते हुए मायावती ने कहा कि उन्होंने उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाया था और आज बसपा को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक वह जीवित और स्वस्थ हैं, दलितों और उपेक्षित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सपा सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार के शासन में दलित और अन्य कमजोर वर्ग बेहद परेशान हैं और प्रदेश की कानून-व्यवस्था भी बिगड़ी हुई है। ऐसी स्थिति में जनता बसपा शासनकाल को याद कर रही है।

इससे पहले मायावती के जन्मदिन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की, जबकि अखिलेश यादव ने उनके सामाजिक संघर्ष को सराहा।

गौरतलब है कि बसपा प्रमुख मायावती का 70वां जन्मदिन पार्टी द्वारा पूरे प्रदेश में ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है।

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