लंदन, 4 नवंबर : हिंदुजा समूह के चेयरमैन और विश्वप्रसिद्ध उद्योगपति गोपीचंद पी. हिंदुजा का लंदन में निधन हो गया है। वह 85 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वह पिछले कुछ सप्ताह से अस्वस्थ थे और लंदन के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।
गोपीचंद हिंदुजा को विशेष रूप से अशोक लेलैंड को अधिग्रहित कर उसे पुनर्जीवित करने के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में इस भारतीय वाहन निर्माता कंपनी ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं और यह भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में सबसे सफल बदलाव की कहानियों में से एक बन गई।
1940 में जन्मे गोपीचंद हिंदुजा चार भाइयों में दूसरे थे। उन्होंने 1959 में मुंबई के जय हिंद कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और अपने पिता परमानंद हिंदुजा के व्यापार से जुड़ते हुए तेहरान में पारिवारिक कारोबार की बागडोर संभाली। 1984 में उनके नेतृत्व में समूह ने गल्फ ऑयल का अधिग्रहण किया और तीन वर्ष बाद 1987 में अशोक लेलैंड को खरीदा — जो भारत में किसी एनआरआई द्वारा किया गया पहला बड़ा अधिग्रहण माना जाता है।
मई 2023 में बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के निधन के बाद गोपीचंद ने 35 अरब पाउंड मूल्य वाले हिंदुजा समूह की कमान संभाली। उनके परिवार में पत्नी सुनीता, बेटे संजय और धीरज, तथा बेटी रीता हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें “एक दूरदर्शी उद्योगपति” बताया जिन्होंने हिंदुजा समूह को एक सच्चे वैश्विक समूह में बदलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “1984 में गल्फ ऑयल के अधिग्रहण से लेकर अशोक लेलैंड के पुनरुद्धार तक उनकी नेतृत्व क्षमता अद्वितीय रही। उनकी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”
जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गोपीचंद हिंदुजा के नेतृत्व ने भारतीय उद्योग जगत को वैश्विक पहचान दिलाई।
गोपीचंद अपने सरल स्वभाव और पारिवारिक मूल्यों के लिए भी जाने जाते थे। उन्हें वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट ऑफ लॉ और रिचमंड कॉलेज, लंदन से मानद डॉक्टरेट ऑफ इकॉनॉमिक्स की उपाधि दी गई थी।
उनका नाम अपने भाइयों श्रीचंद और प्रकाश हिंदुजा के साथ बोफोर्स घोटाले में भी आया था, हालांकि 2005 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया था।
‘द संडे टाइम्स रिच लिस्ट’ के अनुसार, गोपीचंद हिंदुजा और उनका परिवार 35.3 अरब पाउंड की संपत्ति के साथ ब्रिटेन का सबसे अमीर परिवार बना हुआ है। उनकी लंदन की संपत्तियों में बकिंघम पैलेस के पास स्थित ऐतिहासिक कार्लटन हाउस टेरेस और व्हाइटहॉल में ओल्ड वॉर ऑफिस बिल्डिंग (रैफल्स लंदन होटल) शामिल हैं।
गोपीचंद हिंदुजा के निधन से भारतीय और अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत ने एक ऐसे नेता को खो दिया है जिसने दूरदर्शिता, परिश्रम और नैतिकता से व्यवसाय को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा।
