लखनऊ, 29 जनवरी : उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों के स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा उपचार योजना को मंजूरी दे दी। इस योजना के लागू होने से राज्यभर में लगभग 15 लाख लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।
कैबिनेट बैठक के बाद वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में कुल 32 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए थे, जिनमें से 30 को मंजूरी और दो को रोक दिया गया।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि इस योजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षक दिवस पर घोषित कैशलेस मेडिकल सुविधा के अनुरूप लागू किया जाएगा। योजना में कुल 11,95,391 लाभार्थी शामिल होंगे और इस पर अनुमानित 358.61 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
लाभार्थियों में शामिल हैं:
बेसिक शिक्षा परिषद के 4,34,426 शिक्षक
सरकारी सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों के 13,380 शिक्षक
परिषद के तहत स्व-वित्तपोषित मान्यता प्राप्त स्कूलों के 4,72,735 शिक्षक
1,42,929 ‘शिक्षा मित्र’
उच्च प्राथमिक स्कूलों के 24,717 प्रशिक्षक
7,479 वार्डन और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के पूर्णकालिक एवं अंशकालिक शिक्षक
प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत 97,344 रसोइया
2,00,581 विशेष शिक्षक
संदीप सिंह ने बताया कि स्व-वित्तपोषित मान्यता प्राप्त स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए जिला स्तर पर सत्यापन तंत्र स्थापित किया जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता वाली समितियां कैशलेस सुविधा प्रदान करने से पहले लाभार्थियों का सत्यापन करेंगी।
साथ ही, खन्ना ने बताया कि मंत्रिमंडल ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए भी समान कैशलेस मेडिकल योजना को मंजूरी दी है। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि इस योजना में मानदेय पर काम करने वाले शिक्षक और उनके आश्रित परिवार के सदस्य भी शामिल होंगे। लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलेगी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत इस योजना से लगभग 2,97,579 शिक्षकों को लाभ मिलेगा और इसके लिए अनुमानित खर्च लगभग 89.25 करोड़ रुपये आएगा।
